CAG की ऑडिट रिपोर्ट में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (MGCU) में भारी वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। कैंपस निर्माण की लागत महज छह महीने में 850 करोड़ से बढ़कर 1,338 करोड़ रुपये हो गई है।

  • कैंपस निर्माण की लागत में 58% की भारी वृद्धि दर्ज की गई।
  • टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और कार्यों को छोटे हिस्सों में बांटने का आरोप।
  • CAG ने गायब वर्क ऑर्डर और बिना बिल के भुगतान पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

बिहार के मोतिहारी स्थित महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय (MGCU) के स्थायी परिसर के निर्माण में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ियों का मामला सामने आया है। भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की नवीनतम ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, विश्वविद्यालय के कैंपस निर्माण की अनुमानित लागत मात्र छह महीने के भीतर 850 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,338.83 करोड़ रुपये हो गई है।

यह लागत वृद्धि लगभग 58 प्रतिशत की है, जो परियोजना नियोजन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप देने में हुई देरी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) ने शुरुआत में 850 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया था, लेकिन जब मई 2025 में DPR सौंपी गई, तो लागत में 488.83 करोड़ रुपये का उछाल आ चुका था।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that such massive cost escalations in public sector projects often point towards systemic inefficiencies or deliberate mismanagement. When a central university, established by an Act of Parliament, faces such scrutiny, it undermines the trust of taxpayers and the academic community alike.

प्रशासनिक लापरवाही और टेंडर प्रक्रिया में खामियां सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का संकेत देती हैं।

ऑडिट में केवल लागत वृद्धि ही नहीं, बल्कि टेंडर प्रक्रियाओं के उल्लंघन का भी खुलासा हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि कई बड़े कार्यों को जानबूझकर छोटे-छोटे अनुबंधों में विभाजित किया गया ताकि उन्हें खुली निविदा (Open Tendering) की वित्तीय सीमा से नीचे रखा जा सके। इससे प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई और केवल चुनिंदा एजेंसियों को ही काम मिला।

इसके अलावा, विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताओं के अन्य रूप भी देखे गए हैं। ऑडिट में मरम्मत कार्यों पर अनियमित खर्च, बिना वर्क ऑर्डर के भुगतान और सेमिनार एवं वर्कशॉप के नाम पर संदिग्ध खर्चों को उजागर किया गया है। कई मामलों में, टैक्स बिल, जीएसटी विवरण और बोर्डिंग पास जैसे आवश्यक दस्तावेज भी गायब पाए गए हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना 2014 में संसद के एक अधिनियम के माध्यम से की गई थी। वर्तमान में, यह विश्वविद्यालय अपने स्थायी परिसर के बजाय मोतिहारी में चार अस्थायी स्थानों से संचालित हो रहा है।

विवरणप्रारंभिक अनुमान (CPWD)वर्तमान अनुमान (DPR)
कुल लागत₹850 करोड़₹1,338.83 करोड़
लागत में अंतर-₹488.83 करोड़ (58% वृद्धि)
Did You Know?: विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) किसी भी बड़े निर्माण प्रोजेक्ट का ब्लूप्रिंट होती है, जिसमें तकनीकी और वित्तीय विवरण शामिल होते हैं।

Frequently Asked Questions

1. MGCU में लागत क्यों बढ़ी?
मुख्य कारण DPR को अंतिम रूप देने में देरी और खराब परियोजना नियोजन को बताया गया है।

2. CAG की रिपोर्ट में और क्या खामियां हैं?
रिपोर्ट में टेंडर नियमों का उल्लंघन, गायब वर्क ऑर्डर और सेमिनार के नाम पर संदिग्ध खर्चों का उल्लेख है।