भारत के 'मेट्रो मैन' ई. श्रीधरन ने देश के इंजीनियरिंग संस्थानों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान संस्थान मानक से नीचे के इंजीनियर तैयार कर रहे हैं जो व्यावहारिक कौशल में पीछे हैं।
- ई. श्रीधरन ने भारतीय इंजीनियरिंग शिक्षा की गुणवत्ता को 'सब-स्टैंडर्ड' बताया है।
- उन्होंने छात्रों में व्यावहारिक ज्ञान और पेशेवर अनुशासन की कमी पर चिंता जताई है।
- उद्योग की जरूरतों और कॉलेज के पाठ्यक्रम के बीच एक बड़ा अंतर मौजूद है।
भारत के दिग्गज इंजीनियर और 'मेट्रो मैन' के नाम से प्रसिद्ध ई. श्रीधरन ने देश की इंजीनियरिंग शिक्षा प्रणाली पर एक तीखा प्रहार किया है। श्रीधरन, जिन्होंने कोंकण रेलवे और दिल्ली मेट्रो जैसे विशाल प्रोजेक्ट्स को सफलतापूर्वक पूरा किया, का मानना है कि वर्तमान में देश के इंजीनियरिंग कॉलेज और संस्थान बहुत ही निम्न स्तर (sub-standard) के इंजीनियर तैयार कर रहे हैं।
वर्ष 2016 में दिए गए उनके इस बयान ने शिक्षा जगत में एक नई बहस छेड़ दी थी। श्रीधरन के अनुसार, केवल डिग्री प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है; एक वास्तविक इंजीनियर वह है जिसके पास गहरी तकनीकी समझ, अद्यतन कौशल और सख्त पेशेवर अनुशासन हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक दुनिया की समस्याओं को हल करने के लिए होनी चाहिए।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए उच्च गुणवत्ता वाले इंजीनियरों की आवश्यकता है। यदि शिक्षा प्रणाली उद्योग की मांग के अनुरूप नहीं है, तो 'कौशल अंतर' (skill gap) देश के विकास की गति को धीमा कर सकता है।
इंजीनियरिंग केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, इसे व्यावहारिक अनुप्रयोग और समस्या समाधान पर केंद्रित होना चाहिए।
श्रीधरन की आलोचना केवल हालिया नहीं है। 2012 में भी उन्होंने जवाहरलाल नेहरू प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में कहा था कि इंजीनियरिंग कॉलेजों की संख्या तो तेजी से बढ़ रही है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण शिक्षकों और आधुनिक सुविधाओं का भारी अभाव है। पाठ्यक्रम को उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुसार बार-बार अपडेट करने की आवश्यकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ई. श्रीधरन का करियर इंजीनियरिंग की उत्कृष्टता का प्रमाण है। 1990 में कोंकण रेलवे कॉर्पोरेशन के संस्थापक प्रबंध निदेशक के रूप में, उन्होंने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में रेल मार्ग बिछाने का असंभव कार्य किया। बाद में, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के पहले प्रबंध निदेशक के रूप में उनके योगदान ने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई। उन्हें 2008 में भारत के प्रतिष्ठित पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ई. श्रीधरन ने इंजीनियरिंग शिक्षा के बारे में क्या मुख्य चिंता जताई?
उत्तर: उन्होंने कहा कि कॉलेज ऐसे इंजीनियर बना रहे हैं जिनमें व्यावहारिक ज्ञान और पेशेवर अनुशासन की कमी है।
प्रश्न 2: 'मेट्रो मैन' किसे कहा जाता है?
उत्तर: ई. श्रीधरन को उनके दिल्ली मेट्रो और अन्य महत्वपूर्ण परिवहन परियोजनाओं के सफल नेतृत्व के कारण 'मेट्रो मैन' कहा जाता है।