इंजीनियर्स डे 2026 के अवसर पर नए आंकड़े सामने आए हैं, जो दर्शाते हैं कि IIT में महिला छात्रों के नामांकन में 2019 के मुकाबले 52% की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सुपरन्यूमेररी सीटों की नीति ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

  • IIT में महिला छात्रों की कुल संख्या 2019 के 2,416 से बढ़कर 2025 में 3,664 हो गई है।
  • महिला नामांकन में 52% की वृद्धि हुई है, जबकि कुल सीटों में केवल 34% की बढ़ोतरी हुई है।
  • सुपरन्यूमेररी सीटों की नीति के कारण अब लगभग हर IIT में महिला हिस्सेदारी 19% से अधिक है।

भारत में इंजीनियर्स डे 2026 के अवसर पर, देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के लिंग अनुपात में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। हालिया आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में IIT क्लासरूम में महिलाओं की उपस्थिति काफी बढ़ी है। विशेष रूप से, 2019 से 2025 के बीच महिला छात्रों के नामांकन में 52% की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है।

यह वृद्धि केवल प्रतिशत के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। जहाँ 2019 में कुल सीटों का केवल 17.76% हिस्सा महिलाओं के पास था, वहीं 2025 तक यह बढ़कर 20.15% हो गया है। हालांकि प्रतिशत में यह वृद्धि धीमी लग सकती है, लेकिन वास्तविक संख्या में बदलाव काफी गहरा है। 2019 में जहाँ केवल 2,416 महिला छात्राएं थीं, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 3,664 हो गई है।

सुपरन्यूमेररी सीटों का प्रभाव

इस बदलाव के पीछे सरकार की एक रणनीतिक नीति का हाथ है। ऐतिहासिक रूप से IIT में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बहुत कम (लगभग 8%) रहा है। इसे सुधारने के लिए सरकार ने सुपरन्यूमेररी सीटें (अतिरिक्त सीटें) बनाने की घोषणा की थी। इस नीति का उद्देश्य बिना किसी सामान्य छात्र के अवसर को कम किए, महिला नामांकन को चरणबद्ध तरीके से 20% तक ले जाना था।

IIT में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी तकनीकी क्षेत्र में लैंगिक असमानता को पाटने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बदलाव केवल संख्यात्मक नहीं है, बल्कि यह भारत के तकनीकी भविष्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अधिक महिलाएं शामिल होती हैं, तो यह नवाचार (innovation) और समस्या समाधान के नए दृष्टिकोण लेकर आता है। अब लगभग हर चार में से एक छात्र महिला है, जो इंजीनियरिंग के पारंपरिक स्वरूप को बदल रहा है।

IIT-वार प्रदर्शन का तुलनात्मक डेटा

IIT संस्थानकुल सीटें (2025)महिला छात्रमहिला हिस्सा (%)
IIT तिरुपति2555521.57%
IIT मद्रास1,12423721.09%
IIT दिल्ली1,24125620.63%
IIT बॉम्बे1,36426719.57%

डेटा यह भी दर्शाता है कि अब यह बदलाव केवल कुछ चुनिंदा संस्थानों तक सीमित नहीं है। 2019 में जहाँ IIT गोवा में महिलाओं का हिस्सा 16.67% था, वहीं 2025 तक लगभग सभी IITs ने 19% की न्यूनतम सीमा को पार कर लिया है। IIT तिरुपति (21.57%) और IIT मद्रास (21.09%) इस सूची में सबसे आगे हैं।

Did You Know?: IIT में महिलाओं के लिए अतिरिक्त सीटें बनाने का निर्णय इसलिए लिया गया था ताकि मुख्य सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाले छात्रों के अवसरों पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

Frequently Asked Questions

1. क्या महिला सीटों के बढ़ने से सामान्य छात्रों के लिए सीटें कम हुई हैं?
नहीं, डेटा के अनुसार ये 'सुपरन्यूमेररी' सीटें हैं, जिन्हें सामान्य सीटों को कम किए बिना जोड़ा गया है।

2. किस IIT में महिलाओं का प्रतिशत सबसे अधिक है?
2025 के आंकड़ों के अनुसार, IIT तिरुपति में महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक 21.57% है।