PISA 2025 के हालिया आंकड़े बताते हैं कि 15 वर्षीय छात्रों के बीच AI का उपयोग व्यापक हो चुका है, लेकिन यह सीखने और प्रदर्शन के बीच एक गहरा विरोधाभास पैदा कर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, AI का अत्यधिक उपयोग छात्रों के मौलिक कौशल को कमजोर कर सकता है।
- OECD देशों में केवल 14% छात्र ही स्कूल के काम के लिए AI का उपयोग नहीं करते हैं।
- AI का उपयोग करने वाले छात्रों की तुलना में, जो सारांश और शोध के लिए AI का उपयोग नहीं करते थे, विज्ञान में बेहतर प्रदर्शन किया।
- AI को एक 'उत्तर मशीन' के बजाय एक 'सोचने वाले साथी' के रूप में उपयोग करना आवश्यक है।
आधुनिक शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति आ चुकी है। ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) के PISA 2025 के परिणाम एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हैं। आज के 15 वर्षीय छात्र AI चैटबॉट्स के साथ इतने सहज हैं कि केवल 14% छात्र ही ऐसे हैं जो स्कूल के कार्यों के लिए इनका उपयोग नहीं करते हैं।
हालांकि, यह तकनीक एक 'सीखने का विरोधाभास' (AI-learning paradox) पैदा कर रही है। रिपोर्ट दर्शाती है कि जो छात्र टेक्स्ट को सारांशित करने या प्रारंभिक शोध के लिए AI का सहारा नहीं लेते, उन्होंने विज्ञान जैसे विषयों में AI उपयोगकर्ताओं की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। यह इस बात पर सवाल उठाता है कि क्या छात्र वास्तव में सीख रहे हैं या केवल कार्य को सफलतापूर्वक पूरा कर रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि शिक्षा में तकनीक का उद्देश्य केवल मानवीय प्रयास को कम करना नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया को गहरा करना होना चाहिए। यदि AI केवल उत्तर प्रदान करने वाली मशीन बन जाता है, तो छात्र संज्ञानात्मक संघर्ष (cognitive struggle) से वंचित रह जाएंगे, जो वास्तविक समझ विकसित करने के लिए आवश्यक है।
AI को एक 'उत्तर देने वाली मशीन' के बजाय एक 'सोचने वाले साथी' के रूप में विकसित करना ही भविष्य की शिक्षा की असली चुनौती है।
एक और चिंताजनक पहलू यह है कि 2015 से 2025 के बीच OECD देशों में औसत पढ़ने के प्रदर्शन (Reading performance) में गिरावट आई है। जैसे-जैसे मशीनें जानकारी उत्पन्न करने में बेहतर होती जा रही हैं, छात्रों में उस जानकारी की आलोचनात्मक जांच करने की क्षमता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
PISA 2025 ने पहली बार "डिजिटल दुनिया में सीखना" (Learning in the Digital World) डोमेन पेश किया है, जो यह जांचता है कि छात्र डिजिटल उपकरणों का उपयोग करके समस्याओं का समाधान कैसे करते हैं। इसका उद्देश्य हर बच्चे को प्रोग्रामर बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें शक्तिशाली मशीनों के साथ काम करते समय बौद्धिक रूप से नियंत्रण में रखना है।
Frequently Asked Questions
1. क्या AI का उपयोग करने से विज्ञान के अंकों में कमी आती है?
रिपोर्ट के अनुसार, जो छात्र विशिष्ट कार्यों के लिए AI का उपयोग नहीं करते, वे विज्ञान में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, लेकिन यह केवल एक संबंध है, सीधा कारण नहीं।
2. AI साक्षरता का क्या अर्थ है?
AI साक्षरता का अर्थ केवल चैटबॉट को प्रॉम्प्ट देना नहीं है, बल्कि जानकारी को सत्यापित करना और उसकी सटीकता की जांच करना है।