IIT दिल्ली में छात्र की संदिग्ध मौत के बाद बढ़ते विरोध के बीच संस्थान ने जांच समिति का पुनर्गठन किया है। दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस मुक्ता गुप्ता अब इस संवेदनशील मामले की जांच करेंगी।
- IIT दिल्ली के 31 वर्षीय एमएससी छात्र की संदिग्ध मौत के बाद जांच समिति का पुनर्गठन।
- दिल्ली हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस मुक्ता गुप्ता को बनाया गया नया अध्यक्ष।
- समिति छात्र की मौत के कारणों, मानसिक स्वास्थ्य और कैंपस सुरक्षा तंत्र की जांच करेगी।
- पूर्व अध्यक्ष अशोक कुमार ने व्यक्तिगत कारणों से जांच से खुद को अलग किया था।
नई दिल्ली: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली में एक 31 वर्षीय एमएससी भौतिकी (Physics) छात्र की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। इस घटना के बाद से संस्थान में छात्रों का भारी विरोध प्रदर्शन जारी है। मामले की गंभीरता और जांच की निष्पक्षता को देखते हुए, IIT दिल्ली प्रशासन ने जांच समिति का पुनर्गठन किया है और दिल्ली हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस मुक्ता गुप्ता को इस पांच सदस्यीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब परिसर में एक छात्र की संदिग्ध मौत हुई, जिसके बाद से छात्र पिछले चार दिनों से न्याय और सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले, उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार को इस जांच का जिम्मा सौंपा गया था, लेकिन उन्होंने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए पद छोड़ दिया। अब जस्टिस मुक्ता गुप्ता के नेतृत्व में नई समिति इस मामले की तह तक जाएगी।
कौन हैं जस्टिस मुक्ता गुप्ता?
जस्टिस मुक्ता गुप्ता भारत की एक अत्यंत प्रतिष्ठित कानूनी हस्ती हैं। उन्होंने न केवल दिल्ली हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं, बल्कि वे देश के सबसे बड़े आपराधिक मामलों में अभियोजन पक्ष का नेतृत्व भी कर चुकी हैं। उनकी कानूनी यात्रा हिंदू कॉलेज और कैंपस लॉ सेंटर से शुरू हुई थी।
उनके करियर की कुछ प्रमुख उपलब्धियां और मामले निम्नलिखित हैं:
- संसद हमला (2001): उन्होंने इस ऐतिहासिक मामले में अभियोजन का नेतृत्व किया था।
- हाई-प्रोफाइल हत्याकांड: वे जेसिका लाल, नैना साहनी (तंदूर कांड) और नितीश कटारा जैसे चर्चित मामलों में शामिल रही हैं।
- न्यायिक करियर: 2009 में एडिशनल जज और 2014 में स्थायी न्यायाधीश बनीं।
जस्टिस मुक्ता गुप्ता का अनुभव इस संवेदनशील मामले में संस्थान की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
जांच का दायरा और समिति का गठन
जस्टिस गुप्ता के नेतृत्व वाली इस नई समिति में AIIMS नई दिल्ली के मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. प्रताप शरण, दो छात्र प्रतिनिधि और IIT दिल्ली के रजिस्ट्रार शामिल हैं। यह समिति केवल मौत के कारणों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखेगी कि क्या संस्थान के मानसिक स्वास्थ्य समर्थन और सुरक्षा तंत्र में कोई बड़ी खामी थी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों का मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा एक गंभीर संकट बनता जा रहा है। यह जांच न केवल इस मामले का समाधान करेगी, बल्कि देश के अन्य तकनीकी संस्थानों के लिए भी एक मानक स्थापित करेगी।
Frequently Asked Questions
1. नई जांच समिति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
समिति का उद्देश्य छात्र की मौत के कारणों का पता लगाना और परिसर में मानसिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा व्यवस्था की जांच करना है।
2. जस्टिस मुक्ता गुप्ता से पहले जांच कौन कर रहा था?
इससे पहले उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार इस समिति के अध्यक्ष थे।