प्रसिद्ध playback गायक स. जानकी के अंतिम वर्षों को बिताए बॉगडी रोड को उनके सम्मान में नाम बदलने की मांग उनके प्रशंसकों ने की है। मायसूर के बाहर स्थित उनके फार्महाउस के मालिक नवीन कुमार ने राज्य सरकार को यह अनुरोध किया है, जबकि स्थानीय विधायक ने समर्थन दिया है।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- स. जानकी ने अपने अंतिम वर्ष बॉगडी रोड के फार्महाउस में बिताए
- प्रशंसकों ने रोड को उनका नाम देने की आधिकारिक अपील की
- चामुंडेश्वरी के विधायक जी. टी. देवे गोडा ने इस मांग को सरकार तक पहुँचाने का वादा किया
मायसूर‑गड्डी रोड, जिसे अक्सर बॉगडी रोड कहा जाता है, अब एक नई पहचान की तलाश में है: वह स. जानकी के नाम की, जो भारतीय संगीत के इतिहास में सबसे प्रिय playback गायकियों में से एक हैं। कई सालों तक इस सड़क के किनारे स्थित एक फार्महाउस में रहकर, उन्होंने अपने संगीत कैरियर के शिखर से हटकर शांति और प्रकृति के बीच अपने अंतिम अध्याय को लिखा।
फार्महाउस में स. जानकी का जीवन
नवीन कुमार, जो इस फार्महाउस के मालिक हैं, ने बताया कि स. जानकी ने यहाँ अपने जीवन के अंतिम वर्ष बिताए, जहाँ उन्होंने परिवार के सदस्यों की तरह देखभाल पाई। उनकी आवाज़ ने 20 से अधिक भाषाओं में लाखों दिलों को छुआ, परन्तु मायसूर में उनका जीवन बहुत ही निजी और सरल था। इस कारण, शहर के संगीत प्रेमियों के लिए उनकी उपस्थिति एक गुप्त गर्व का स्रोत बन गई।
भावनात्मक अपील और राजनीतिक समर्थन
नवीन कुमार ने राज्य सरकार के सामने एक भावनात्मक अपील करते हुए कहा, “मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूँ कि बॉगडी रोड को स. जानकी के नाम से पुनः नामित किया जाए। यह उनके अमर योगदान को सम्मानित करने का एक उचित कदम होगा।” इस अपील को चामुंडेश्वरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक जी. टी. देवे गोडा ने समर्थन दिया और आश्वासन दिया कि वे इस माँग को सरकार तक पहुँचाएंगे।
स्मृति के रूप में नाम परिवर्तन का महत्व
सड़कों का नाम बदलना केवल एक प्रतीकात्मक कार्य नहीं है; यह सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और भविष्य की पीढ़ियों को प्रेरित करने का साधन भी है। यदि बॉगडी रोड को स. जानकी के नाम किया गया, तो यह न केवल उनके संगीत योगदान को सम्मान देगा, बल्कि मायसूर को संगीत‑प्रेमियों के लिए एक पवित्र स्थल के रूप में स्थापित करेगा।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि यह प्रस्ताव सफल होता है, तो यह अन्य शहरों में समान स्मारक कार्यों के लिए एक मिसाल बन सकता है। साथ ही, इस कदम से पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है, क्योंकि संगीत इतिहास के उत्साही लोग मायसूर की ओर आकर्षित हो सकते हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।