ब्रिटिश अभिनेता बेनेडिक्ट गैरेट ने यश की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'टॉक्सिक' की समीक्षा करते हुए इसे एक साधारण एक्शन फिल्म के बजाय 'वयस्कों के लिए एक परी कथा' बताया है। उन्होंने फिल्म में दिखाए गए गहरे मनोवैज्ञानिक विषयों और विरासत में मिले आघात (trauma) पर चर्चा की है।
- बेनेडिक्ट गैरेट के अनुसार, 'टॉक्सिक' एक पारंपरिक एक्शन फिल्म नहीं बल्कि एक मनोवैज्ञानिक परी कथा है।
- फिल्म पुरुष और महिला दोनों के भीतर मौजूद 'विषाक्तता' (toxicity) और विरासत में मिले आघात को दर्शाती है।
- निर्देशक गीतू मोहनदास की प्रशंसा करते हुए गैरेट ने कहा कि उन्होंने फिल्म निर्माण के पारंपरिक सांचों को तोड़ दिया है।
ब्रिटिश अभिनेता बेनेडिक्ट गैरेट, जो यश की आगामी फिल्म 'टॉक्सिक' (Toxic) में 'पेड्रो' की भूमिका निभा रहे हैं, ने फिल्म को पहली बार सिनेमाघर में देखने के बाद एक गहरा और व्यक्तिगत अनुभव साझा किया है। गैरेट ने स्पष्ट किया कि दर्शकों द्वारा फिल्म को केवल एक एक्शन ब्लॉकबस्टर के रूप में देखना एक गलतफहमी हो सकती है। उनके अनुसार, फिल्म की असली शक्ति इसकी टैगलाइन में छिपी है: 'वयस्कों के लिए एक परी कथा' (A fairy tale for grown-ups)।
गैरेट ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में कहा कि फिल्म को समझने के लिए इसे वास्तविकता के चश्मे से नहीं, बल्कि एक रूपक (metaphor) के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने बताया कि फिल्म में उपयोग किए गए मुखौटे, पागलपन, हिंसा, धर्म और उपनिवेशवाद जैसे तत्व वास्तव में उस 'विषाक्तता' को दर्शाते हैं जिसे समाज ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपनाया है। यह फिल्म केवल बाहरी संघर्षों के बारे में नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति के भीतर चल रहे मनोवैज्ञानिक युद्ध और उसके मानसिक भ्रमों के बारे में है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यश जैसी बड़ी स्टार पावर वाली फिल्मों के साथ अक्सर यह जोखिम रहता है कि वे केवल मनोरंजन तक सीमित रह जाएं। हालांकि, 'टॉक्सिक' का विषय और इसकी बनावट इसे भारतीय सिनेमा की सामान्य व्यावसायिक फिल्मों से अलग खड़ा करती है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है।
'टॉक्सिक' केवल पुरुषों द्वारा पैदा की जाने वाली विषाक्तता के बारे में नहीं है; महिलाएं भी विषाक्त हो सकती हैं। हम सभी इस दुनिया के उत्पाद हैं।
फिल्म के संवादों की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए, गैरेट ने तर्क दिया कि चूंकि यह एक 'परी कथा' है, इसलिए संवादों का प्राकृतिक होना आवश्यक नहीं है। उन्होंने कहा कि फिल्म का उद्देश्य वास्तविकता का चित्रण करना नहीं, बल्कि समाज के सामने एक आईना रखना है। उन्होंने निर्देशक गीतू मोहनदास की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने दर्शकों को खुश करने के लिए फॉर्मूला आधारित फिल्म बनाने के बजाय, उन्हें चुनौती देने और विचलित करने का साहस दिखाया है।
यश के प्रदर्शन पर बात करते हुए, गैरेट ने उन्हें 'सांस रोक देने वाला' बताया। उन्होंने कहा कि एक अभिनेता के रूप में उनके साथ काम करने के बाद, एक दर्शक के रूप में उनका प्रदर्शन देखकर वे पूरी तरह दंग रह गए। गैरेट का मानना है कि फिल्म के प्रति मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि फिल्म ने लोगों को प्रभावित किया है, क्योंकि एक महान फिल्म या तो बहुत प्यार की जाती है या बहुत नफरत की जाती है।
Frequently Asked Questions
1. क्या 'टॉक्सिक' एक शुद्ध एक्शन फिल्म है?
नहीं, बेनेडिक्ट गैरेट के अनुसार यह एक मनोवैज्ञानिक परी कथा है जो आघात और समाज के विषाक्त पहलुओं को दिखाती है।
2. फिल्म के निर्देशक कौन हैं?
फिल्म का निर्देशन गीतू मोहनदास ने किया है, जिनकी गैरेट ने कलात्मक साहस के लिए प्रशंसा की है।