प्रियादर्शन के निर्देशन में बनी 'हैवान' अक्षय कुमार और सैफ अली खान को एक साथ लाती है, लेकिन कमजोर पटकथा और अतार्किक दृश्यों के कारण यह फिल्म निराश करती है।

  • सैफ अली खान ने एक दृष्टिहीन व्यक्ति की भूमिका निभाई है, जबकि अक्षय कुमार मुख्य खलनायक हैं।
  • फिल्म 2016 की मलयालम हिट 'ओप्पम' का आधिकारिक रीमेक है।
  • फिल्म को 5 में से केवल 2 स्टार की रेटिंग दी गई है।

निर्देशक प्रियादर्शन एक बार फिर अपनी पुरानी शैली के साथ लौटे हैं, जहाँ वे विभिन्न शैलियों (genres) का मिश्रण करने की कोशिश करते हैं। 'हैवान' में उन्होंने अपनी 2016 की मलयालम हिट 'ओप्पम' को हिंदी में ढालने का प्रयास किया है। फिल्म की कहानी एक दृष्टिहीन व्यक्ति श्याम (सैफ अली खान) और एक क्रूर हत्यारे परशुराम (अक्षय कुमार) के बीच के संघर्ष पर आधारित है।

फिल्म की संरचना दो भागों में बंटी है। पहले भाग में एक मासूम व्यक्ति को गलत तरीके से जेल भेजे जाने की कहानी दिखाई गई है, जबकि दूसरा भाग एक पुलिस प्रक्रिया (police procedural) में बदल जाता है, जो अनजाने में हास्य पैदा करता है। हालांकि, प्रियादर्शन की फिल्मों में यह टोनल शिफ्ट अक्सर देखा जाता है, लेकिन यहाँ यह प्रभावहीन साबित होता है।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि अक्षय और सैफ जैसे बड़े सितारों का पुनर्मिलन केवल स्टार पावर के दम पर सफल नहीं हो सकता। जब पटकथा में गहराई की कमी होती है और तर्क (logic) को किनारे कर दिया जाता है, तो दर्शक खुद को कहानी से नहीं जोड़ पाते। विशेष रूप से एक्शन दृश्यों में, जहाँ एक दृष्टिहीन व्यक्ति को चार हट्टे-कट्टे पुलिसकर्मियों को आसानी से हराते दिखाया गया है, वहाँ फिल्म 'सस्पेंशन ऑफ डिसबिलीफ' की सीमाओं को पार कर जाती है।

'हैवान' एक ऐसी फिल्म है जो अपनी स्टार कास्ट की क्षमता का पूरा उपयोग करने में विफल रहती है और केवल एक औसत रीमेक बनकर रह जाती है।

अभिनय की बात करें तो सैफ अली खान को अधिक विस्तार वाला किरदार मिला है। वे संगीत वाद्ययंत्र बजाने से लेकर एक छोटी बच्ची के संरक्षक बनने तक की भूमिका निभाते हैं। वहीं अक्षय कुमार का किरदार केवल डराने और हत्या करने तक सीमित है। सहायक कलाकारों में बोमन ईरानी ने एक आत्मग्लानि से भरे जज की भूमिका में फिल्म को स्थिरता प्रदान की है।

फिल्म में कई उप-कथानक हैं, जिनमें श्रिया पिलगांवकर, शारिब हाशमी और राजपाल यादव जैसे कलाकार शामिल हैं। लेकिन ये सब बिखरे हुए लगते हैं और मुख्य कहानी में कोई खास मूल्य नहीं जोड़ते। फिल्म का क्लाइमेक्स भी वह रोंगटे खड़े करने वाला अनुभव नहीं दे पाता जिसकी उम्मीद एक थ्रिलर से की जाती है।

क्या आप जानते हैं?: यह फिल्म 2016 की मलयालम फिल्म 'ओप्पम' की रीमेक है, जिसे समीक्षकों ने उसकी मौलिकता और सस्पेंस के लिए काफी सराहा था।
विशेषतामूल फिल्म (Oppam)हैवान (Haiwaan)
पटकथातार्किक और सस्पेंस से भरपूरअतार्किक और कमजोर
टोनगंभीर थ्रिलरथ्रिलर और कॉमेडी का अजीब मिश्रण
प्रभावक्रिटिकली एक्लेम्डऔसत/निराशाजनक

प्रश्न 1: क्या 'हैवान' एक ओरिजिनल कहानी है?
नहीं, यह 2016 की मलयालम हिट फिल्म 'ओप्पम' का आधिकारिक रीमेक है।

प्रश्न 2: फिल्म की मुख्य कमजोरी क्या है?
फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी अतार्किक पटकथा और टोनल असंगति है, जो इसे एक गंभीर थ्रिलर बनाने से रोकती है।