कानपुर के उद्देश्य सचान ने अपनी गरीबी और संघर्षों को पीछे छोड़ते हुए KBC 18 में ₹12.5 लाख जीते। उन्होंने मात्र ₹250 से एक मुफ्त स्कूल की शुरुआत की थी।
- उद्देश्य सचान ने KBC 18 में ₹25 लाख के सवाल पर गेम छोड़कर ₹12.5 लाख जीते।
- उन्होंने कानपुर में 400 वंचित बच्चों के लिए एक मुफ्त स्कूल शुरू किया है।
- बचपन में फीस न भर पाने के कारण उन्हें दो बार स्कूल से निकाला गया था।
अमिताभ बच्चन द्वारा होस्ट किए गए कौन बनेगा करोड़पति 18 के गुरुवार के एपिसोड में उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले उद्देश्य सचान की प्रेरक कहानी सामने आई। उद्देश्य की जीवन यात्रा संघर्ष और संकल्प की एक अद्भुत मिसाल है, जिन्होंने अपनी व्यक्तिगत तकलीफों को समाज के लिए अवसर में बदल दिया।
उद्देश्य ने साझा किया कि उनके पिता एक दर्जी थे और महीने में केवल ₹4,000-₹5,000 कमाते थे। आर्थिक तंगी के कारण, जब उनकी माताजी को बिजली का झटका लगा और परिवार मुश्किल दौर से गुजरा, तो उनके पिता स्कूल की फीस नहीं भर पाए। इस वजह से उद्देश्य को 6 और 9 साल की उम्र में दो बार स्कूल से निकाल दिया गया, जहाँ शिक्षकों ने उनकी गरीबी का मजाक उड़ाया।
₹250 से शिक्षा क्रांति की शुरुआत
इन कड़वे अनुभवों ने उद्देश्य को यह सिखाया कि शिक्षा ही जीवन बदलने का एकमात्र जरिया है। करीब आठ साल पहले, अपनी माँ से उधार लिए गए मात्र ₹250 से उन्होंने एक स्कूल की नींव रखी। शुरुआत में उन्होंने एक पेड़ के नीचे कुछ बच्चों को पढ़ाना शुरू किया और पंपलेट्स छपवाकर घर-घर जाकर बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित किया। आज उनका यह प्रयास एक पक्के स्कूल के रूप में विकसित हो चुका है, जहाँ 400 बच्चे कक्षा 12 तक मुफ्त शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, उद्देश्य की कहानी भारतीय शिक्षा प्रणाली की उन खामियों को उजागर करती है जहाँ आर्थिक अभाव बच्चों को उनके मौलिक अधिकार से वंचित कर देता है। यह दर्शाता है कि कैसे सोशल मीडिया और आर माधवन जैसे कलाकारों के समर्थन से जमीनी स्तर के बदलावों को वैश्विक पहचान मिल सकती है।
जब एक पीड़ित व्यक्ति स्वयं शिक्षक बन जाता है, तो वह केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि सहानुभूति और सशक्तिकरण का पाठ पढ़ाता है।
खेल के दौरान, उद्देश्य ₹25 लाख के सवाल पर पहुँचे: "किस प्राचीन भारतीय शासक को 'अमित्रघात' की उपाधि से भी जाना जाता था?" महाफ्लिप और 50:50 लाइफलाइन का उपयोग करने के बाद भी, वे बिम्बिसार और बिन्दुसार के बीच दुविधा में थे। जोखिम न लेते हुए, उन्होंने गेम छोड़ने का फैसला किया और ₹12.5 लाख लेकर घर लौटे। दिलचस्प बात यह रही कि गेम के बाद उनका अनुमान 'बिन्दुसार' था, जो कि सही उत्तर था।
| विवरण | शुरुआत में | वर्तमान में |
|---|---|---|
| पूँजी | ₹250 (उधार) | दान और सहयोग |
| ढांचा | पेड़ के नीचे | पक्का स्कूल भवन |
| छात्र संख्या | कुछ बच्चे | 400 से अधिक |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 'अमित्रघात' के नाम से किसे जाना जाता था?
उत्तर 1: मौर्य सम्राट बिन्दुसार को, जो चंद्रगुप्त मौर्य के पुत्र और सम्राट अशोक के पिता थे।
प्रश्न 2: उद्देश्य सचान ने अपनी पढ़ाई कैसे पूरी की?
उत्तर 2: उन्होंने ढाबों, कैफे और फैक्ट्रियों में छोटे-मोटे काम किए और पिता के सहयोग से अपनी शिक्षा पूरी की।