बेंगलुरु स्थित नृत्य समूह 'नृत्यकोश' द्वारा निर्देशित देबप्रिया दास की नई नृत्य-थिएटर प्रस्तुति 'टू बर्न टू ब्लूम' महान मिस्र की गायिका उम्म कुलथुम को एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। यह प्रदर्शन संगीत, नृत्य और दृश्य कहानी के माध्यम से उनकी कलात्मक यात्रा को जीवंत करता है।

  • 'टू बर्न टू ब्लूम' नृत्य-थिएटर प्रस्तुति उम्म कुलथुम के जीवन और संगीत को समर्पित है।
  • देबप्रिया दास और उनका समूह 'नृत्यकोश' मिस्र के शास्त्रीय संगीत और नृत्य का संगम पेश करेंगे।
  • यह प्रदर्शन 20 सितंबर को बेंगलुरु के एलायंस फ्रांसे में आयोजित किया जाएगा।

मिस्र की महान गायिका उम्म कुलथुम, जिन्हें 'मिस्र की आवाज़' के रूप में जाना जाता है, की मृत्यु के पांच दशक बाद भी उनका संगीत पूरी दुनिया में गूँज रहा है। अब, बेंगलुरु स्थित नृत्य समूह नृत्यकोश (Nrityakosh) उनकी विरासत को एक नए रूप में मंच पर लाने जा रहा है। देबप्रिया दास द्वारा निर्देशित नृत्य-थिएटर प्रस्तुति 'टू बर्न टू ब्लूम' (To Burn to Bloom) उम्म कुलथुम के संगीत और उनकी कलात्मक यात्रा को समर्पित है।

इस प्रस्तुति की उत्पत्ति देबप्रिया दास की व्यक्तिगत यात्रा से हुई है, जिसमें उन्होंने मिस्र के शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ मिस्र के नृत्य का भी गहन अध्ययन किया है। 60 मिनट की यह प्रस्तुति केवल एक जीवनी नहीं है, बल्कि उम्म कुलथुम के संगीत के माध्यम से भावनाओं के उतार-चढ़ाव का एक सफर है।

कलात्मक गहराई और भावनात्मक जुड़ाव

देबप्रिया दास के अनुसार, उम्म कुलथुम का संगीत प्रेम, विरह, हृदय टूटने और समर्पण जैसी जटिल भावनाओं को व्यक्त करने की अद्भुत क्षमता रखता है। BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस तरह के क्रॉस-कल्चरल (अंतर-सांस्कृतिक) प्रदर्शन दर्शकों को भौगोलिक सीमाओं से परे ले जाने में सक्षम होते हैं। यह शो संगीत को सरल बनाने के बजाय, नृत्य और दृश्य कहानी के माध्यम से उसकी गंभीरता को बनाए रखता है।

उम्म कुलथुम का संगीत भाषा की बाधाओं को पार कर जाता है; भले ही शब्द अनजाने हों, लेकिन उनकी आवाज़ का दर्द और संगीत की कविता सीधे आत्मा को छूती है।

यह उत्पादन मिस्र के नृत्य, संगीत, पाठ और समकालीन थिएटर का एक अनूठा मिश्रण है। देबप्रिया दास ने पारंपरिक 'बेली डांस' को समकालीन भारतीय दर्शकों के लिए अधिक सुलभ और कलात्मक बनाने का प्रयास किया है, बिना उसकी मूल आत्मा को बदले।

ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक संगम

प्रस्तुति के माध्यम से 20वीं सदी के मध्य के काहिरा (Cairo) के वातावरण को पुनर्जीवित किया गया है। इसमें उस दौर के परिधानों, प्रकाश व्यवस्था और ऐतिहासिक दृश्यों का उपयोग किया गया है। 1930 से 1970 के बीच लोकप्रिय हुए गीतों के माध्यम से उस सांस्कृतिक परिवेश को दर्शाया गया है जिसने उम्म कुलथुम को महान बनाया।

Did You Know?: उम्म कुलथुम को अक्सर 'अरब जगत की सबसे प्रभावशाली महिला' माना जाता है, जिनका संगीत आज भी मध्य पूर्व की पहचान है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: 'टू बर्न टू ब्लूम' का मुख्य विषय क्या है?
उत्तर: यह प्रस्तुति मिस्र की महान गायिका उम्म कुलथुम की कलात्मक यात्रा और उनके संगीत के माध्यम से व्यक्त होने वाली भावनाओं का एक नृत्य-आधारित चित्रण है।

प्रश्न 2: यह प्रदर्शन कहाँ आयोजित किया जाएगा?
उत्तर: यह प्रदर्शन बेंगलुरु के एलायंस फ्रांसे (Alliance Française) में आयोजित किया जाएगा।