दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने संशोधित ट्रांजिट‑ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत परियोजना अनुमोदन के लिए एकीकृत ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया। यह पोर्टल 207 वर्ग किलोमीटर मेट्रो कॉरिडोर और 500 मीटर के रेडियल रैपिड ट्रांजिट ज़ोन को कवर करता है, जिससे सस्ते आवास और मिश्रित‑उपयोग विकास को तेज़ी मिलेगी।
नई दिल्ली – दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने बुधवार को एक डिजिटल पोर्टल का आरम्भ किया, जिससे डेवलपर्स को संशोधित ट्रांजिट‑ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीति के तहत परियोजना अनुमोदन प्रक्रिया को एक ही छत के नीचे पूरा करने की सुविधा मिलेगी। यह पहल न केवल अनुमोदन समय को घटाएगी, बल्कि कई सरकारी एजेंसियों से अलग‑अलग अनुमति लेने की जटिलता को भी समाप्त करेगी।
विस्तारित TOD कवरेज और नई नीति के प्रमुख बिंदु
6 अप्रैल को प्रकाशित नई नीति के अनुसार, अब 207 वर्ग किलोमीटर मेट्रो कॉरिडोर और क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम तथा रेलवे स्टेशनों के 500 मीटर त्रिज्या के भीतर TOD प्रोजेक्ट्स की अनुमति होगी। इसके अतिरिक्त, लगभग 80 वर्ग किलोमीटर भूमि पूलिंग नीति, कम‑घनत्व वाले आवासीय क्षेत्रों और अनधिकृत कॉलोनियों को भी पहली बार TOD ढांचे में शामिल किया गया है, जो पहले की नीति में बाहर थे।
एकीकृत मंजूरी प्रक्रिया: ऑनलाइन, पारदर्शी और समय‑बद्ध
डीडीए ने कहा कि पोर्टल पर डेवलपर्स को पहले TOD प्लॉट की स्वीकृति लेनी होगी, उसके बाद ही निर्माण योजना जमा कर सकेंगे। एक विशेष TOD समिति, जिसका नेतृत्व डीडीए के उप‑अध्यक्ष करेंगे और जिसमें सभी संबंधित एजेंसियों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, एक‑विंडो क्लियरेंस प्रदान करेगी। इससे कई विभागों से अलग‑अलग शुल्क और दस्तावेज़ीकरण की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी।
सिंगल‑विंडो शुल्क संरचना
नयी प्रणाली में विभिन्न एजेंसियों को भुगतान किए जाने वाले शुल्कों को एक ही TOD शुल्क में समेकित किया गया है। इसमें दिल्ली जल बोर्ड से जल‑सेवरेज शुल्क, दिल्ली नगर निगम से स्वीकृति शुल्क, भूमि‑उपयोग परिवर्तन शुल्क, अतिरिक्त फ़्लोर एरिया रेशियो (FAR) लेवी और डीडीए की लीजहोल्ड‑टू‑फ्रीहोल्ड परिवर्तन शुल्क शामिल हैं। यह संरचना न केवल लेन‑देनों को सरल बनाती है, बल्कि डेवलपर्स के लिए वित्तीय योजना को भी स्पष्ट करती है।
आगे के प्रभाव और संभावित चुनौतियाँ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पोर्टल के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन के निकट सस्ते आवास और मिश्रित‑उपयोग विकास को तेज़ी मिलेगी, जिससे दिल्ली की जनसंख्या वृद्धि और ट्रैफ़िक जाम को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी। हालांकि, नीति के कार्यान्वयन में भूमि‑स्वामित्व विवाद, अनधिकृत बस्तियों का पुनर्वास और पर्यावरणीय अनुमोदन की जटिलता जैसे मुद्दे अभी भी प्रमुख चुनौतियों के रूप में उभर सकते हैं।
डीडीए ने कहा कि यह डिजिटल पहल न केवल प्रक्रिया को तेज़ करेगी, बल्कि पारदर्शिता और जवाबदेही को भी बढ़ाएगी, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और दिल्ली में सतत शहरी विकास को नई दिशा मिलेगी।