पिछले दो दिनों की लगातार बारिश ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता को इस वर्ष की सबसे साफ़ स्तर पर पहुंचा दिया है, जबकि तापमान में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। मौसम विभाग ने गुरुवार के लिए पीला चेतावनी जारी किया है, जिससे नागरिकों को हल्की बारिश और संभावित तूफानों के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
इंडिया मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के सफ़दरजंग बेस स्टेशन ने इस माह अब तक 31.52 मिमी बारिश दर्ज की है, जबकि जुलाई का औसत 209.7 मिमी है। दो लगातार बारिश के सत्रों ने राजधानी की वायु को साफ़ किया, जिससे 2026 का सबसे कम एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 59 अंक पर पहुँचा, जो ‘संतोषजनक’ श्रेणी में आता है।
बारिश के प्रभाव
बारिश ने न केवल धूल और कणों को नीचे ले जाकर वायु को शुद्ध किया, बल्कि शहर के कई क्षेत्रों में जलभराव को भी कम किया। रिड्ज़ मौसम स्टेशन ने पिछले 24 घंटे में 54.3 मिमी बारिश दर्ज की, जिससे जुलाई का कुल 79.1 मिमी हो गया, जो सामान्य से 154 प्रतिशत अधिक है। अयनागर और गुड़गांव जैसे पड़ोस में भी क्रमशः 51 मिमी और 83 मिमी की बारिश हुई, जो लंबी अवधि के औसत से काफी अधिक है।
वायु गुणवत्ता पर आँकड़े
सीपीसीबी के डेटा के अनुसार, इस वर्ष 12 जून को AQI का पिछला न्यूनतम 73 था, जबकि अब यह 59 पर गिर गया है। जुलाई में तीन दिन ‘संतोषजनक’ (AQI 51‑100) और बाकी दिनों में ‘मध्यम’ (AQI 101‑200) दर्ज किया गया। जून में भी तीन दिन ‘संतोषजनक’ रहा, लेकिन माह का औसत AQI 141 रहा, जो इस वर्ष की गिरावट को और स्पष्ट करता है।
तापमान में गिरावट और स्वास्थ्य प्रभाव
सफ़दरजंग पर अधिकतम तापमान 30.8°C रहा, जो सामान्य से 5.8°C नीचे और मंगलवार के आंकड़े से 6.4°C कम है। न्यूनतम तापमान 25.4°C, जो पिछले दिन से 4.6°C घटा। गुड़गांव में अधिकतम तापमान 9.4°C तक गिरा, जबकि न्यूनतम 4.8°C तक घटा। इस अचानक ठंड के कारण संवेदनशील समूह—बुजुर्ग, बच्चे और श्वसन रोगी—को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
पीला चेतावनी और संभावित तूफ़ान
IMD ने गुरुवार के लिए पीला चेतावनी जारी की है, जिसका अर्थ है हल्की बारिश, बवंडर और कभी‑कभी तेज़ हवाएँ। विभाग ने बताया कि उत्तर‑पश्चिम मध्य प्रदेश और दक्षिण‑पश्चिम उत्तर प्रदेश में एक स्पष्ट लो‑प्रेशर क्षेत्र बना हुआ है, जो दक्षिण‑पश्चिमी मानसून के आगे बढ़ने को सुगम बना रहा है। इस कारण से अगले 24 घंटे में बादल छाए रहेंगे और बिखरते बौछारों की संभावना है।
भविष्य की दृष्टि
यदि यह वर्षा क्रम जारी रहती है, तो दिल्ली की वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार की संभावना है, हालांकि औद्योगिक उत्सर्जन और वाहन धुंआ अभी भी प्रमुख चुनौती बने रहेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसमी बारिश के साथ-साथ दीर्घकालिक नीतियों—जैसे कड़ी उत्सर्जन मानक और हरित क्षेत्रों का विस्तार—की जरूरत है, ताकि दिल्ली को धुंध‑मुक्त शहर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकें।