चीनी शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण तिब्बत के पठार पर ग्लेशियर तेजी से सिमट रहे हैं, जिससे 14,000 से अधिक हिमनद झीलें बन गई हैं और बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

  • तिब्बत के पठार पर ग्लेशियरों का क्षेत्रफल 51,000 वर्ग किमी से घटकर 39,000 वर्ग किमी रह गया है।
  • पिछले 60 वर्षों में हिमालय और गंगदीस पर्वत श्रृंखला में ग्लेशियर 40% तक कम हो गए हैं।
  • पठार पर वर्तमान में 14,000 से अधिक हिमनद झीलें मौजूद हैं, जो आपदा का खतरा बढ़ा रही हैं।

चीनी वैज्ञानिकों ने एक चिंताजनक अध्ययन में खुलासा किया है कि बढ़ता वैश्विक तापमान तिब्बत के पठार पर ग्लेशियरों के विनाश का मुख्य कारण है। शोधकर्ताओं ने हाल ही में नेपाल-चीन सीमा पर हुई विनाशकारी ग्लेशियर घटना को इसी जलवायु परिवर्तन से जोड़कर देखा है। अध्ययन के अनुसार, ग्लेशियरों के पीछे हटने से न केवल बर्फ कम हो रही है, बल्कि हिमनद झीलों (glacial lakes) की संख्या और आकार में भी भारी वृद्धि हुई है।

ग्लेशियरों के सिमटने का भयावह आंकड़ा

चीनी अकादमी के विज्ञान संस्थान (Chinese Academy of Sciences) के शोधकर्ताओं के अनुसार, पिछले छह दशकों में ग्लेशियरों के क्षेत्रफल में भारी गिरावट देखी गई है। जहाँ पहले यह क्षेत्र 51,000 वर्ग किलोमीटर था, वहीं अब घटकर केवल 39,000 वर्ग किलोमीटर रह गया है। यह गिरावट विशेष रूप से पठार के दक्षिणी हिस्सों में देखी गई है।

क्षेत्रीय प्रभाव और हिमालयी संकट

गंगदीस पर्वत (Gangdise Mountains), न्यूचैन तांगल्हा पर्वत और हिमालय के क्षेत्रों में पिछले 60 वर्षों में ग्लेशियरों में लगभग 40% की कमी आई है। संपूर्ण तिब्बती पठार पर ग्लेशियरों का कुल क्षेत्रफल 24% तक सिकुड़ गया है। यह परिवर्तन न केवल पारिस्थितिकी तंत्र को बदल रहा है, बल्कि downstream (निचले इलाकों) में रहने वाली आबादी के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहा है।

ग्लेशियरों का यह तीव्र क्षरण वैश्विक तापन का सीधा परिणाम है, जो भविष्य में विनाशकारी बाढ़ का कारण बनेगा।

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि भारत और नेपाल जैसे देशों के लिए यह स्थिति अत्यंत संवेदनशील है। शोधकर्ताओं ने पाया कि चीन की दक्षिणी सीमाओं के पास हिमालयी क्षेत्र में हिमनद झीलों का विस्तार प्रति वर्ष औसतन 1% की दर से हो रहा है।

Why This Matters

हिमनद झीलों के फटने (GLOF) से अचानक आने वाली बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम बढ़ गया है। 14,000 से अधिक झीलों का अस्तित्व और उनका तेजी से फैलना एक 'टाइम बम' की तरह है, जो दक्षिण एशिया की नदियों के प्रवाह और सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

Did You Know?: तिब्बत के पठार पर मौजूद 14,000 से अधिक हिमनद झीलों का कुल क्षेत्रफल 1,100 वर्ग किलोमीटर से अधिक है।
अवधि/क्षेत्रग्लेशियर क्षेत्रफल (वर्ग किमी)कमी का प्रतिशत
60 वर्ष पूर्व51,000-
वर्तमान स्थिति39,000~24% (औसत)
दक्षिणी हिमालयी क्षेत्र-40% तक

Frequently Asked Questions

1. ग्लेशियरों के पिघलने का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि और जलवायु परिवर्तन है।

2. इससे भारत और नेपाल पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इससे अचानक आने वाली बाढ़ (Flash Floods) और नदियों के जल स्तर में अनिश्चित बदलाव का खतरा बढ़ जाएगा।