चित्तूर वन विभाग ने एक एकल नर हाथी को कुंकी बनाने के उद्देश्य से पकड़ने का ऑपरेशन शुरू किया है। प्रशिक्षित कुंकी गनेश, जयंत, कृष्ण और अभिमन्यू इस मिशन में हाथी को पकड़ने और प्रशिक्षण देने में सहायता करेंगे।

चित्तूर जिले में चित्तूर‑बीजिंगु राष्ट्रीय राजमार्ग के मोघिली घाट से गुजरने वाला एक एकल नर हाथी, हाल ही में बढ़ते मानव‑हाथी संघर्ष का प्रतीक बनकर सामने आया है। वन विभाग ने इस हाथी को पकड़ कर कुंकी (हाथी के प्रशिक्षित साथी) के रूप में प्रशिक्षित करने की योजना बनाई है। यह कदम पामामानेर वन क्षेत्र में बढ़ती हुई घनिष्ठता और कृषि भूमि पर हाथियों के बार‑बार प्रवेश को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है।

कुंकी क्या है?

कुंकी वह हाथी होता है जिसे विशेष प्रशिक्षण से मानव आदेशों पर चलने और फील्ड ऑपरेशनों में सहायता करने के लिए तैयार किया जाता है। भारत में इस प्रथा का इतिहास सैकड़ों वर्षों पुराना है, और यह वन्यजीव प्रबंधन तथा सुरक्षा कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

ऑपरेशन का ढाँचा

इस ऑपरेशन में गनेश, जयंत, कृष्ण और अभिमन्यू – चार कुंकी, जिनका अनुभव और प्रशिक्षण पहले ही सिद्ध है – को नए हाथी को पकड़ने और उसे प्रशिक्षित करने में मदद करने के लिए तैनात किया गया है। गनेश, जिसे श्री वेंकटेश्वर ज़ूलॉजिकल पार्क, त्रिपुति में प्रशिक्षित किया गया है, को मूसलिमदुगु कुंकी कैम्प, पामामानेर के पास स्थानांतरित किया जाएगा। वहीं, डेव नामक हाथी को भी प्रशिक्षण के लिए त्रिपुति चिड़ियाघर में भेजा गया है।

पहले हाथी को पकड़ने के बाद, उसे विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा, जिसमें जिगरी और गन्ने की मिठाई का इनाम दिया जाएगा। यह चरण मानव उपस्थिति के प्रति अनुकूलन और आदेशों को समझने का आधार बनाता है। बाद में, यह हाथी धीरे‑धीरे वन क्षेत्र में परिचित कराया जाएगा और अनुभवी कुंकी के साथ फील्ड में तैनात किया जाएगा।

मानव‑हाथी संघर्ष का संदर्भ

पिछले कुछ वर्षों में मोघिली घाट और पामामानेर के आसपास तीन हाथी समूह (१७, १४ और ७) ने कृषि भूमि और निवास स्थानों में घुसपैठ बढ़ा दी है, जिससे स्थानीय किसानों को आर्थिक और सुरक्षा की चिंताएं हैं। इस संदर्भ में, कुंकी कार्यक्रम एक संतुलित समाधान के रूप में उभर रहा है, जो मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

भविष्य के लिए दृष्टिकोण

चित्तूर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार कुंकी के रूप में प्रशिक्षित हाथियों का उपयोग करके वन क्षेत्र में हाथी के खतरे को कम करने का प्रयास है। यदि सफल रहा, तो यह मॉडल अन्य त्रि‑राज्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सकता है, जिससे मानव‑हाथी संघर्ष को राष्ट्रीय स्तर पर नियंत्रित किया जा सके।