चीन ने नेपाल को ल्हन्दे नदी के ऊपरी हिस्से में बन रही एक ग्लेशियर झील के संबंध में एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिसमें कभी भी फटने के संकेत मिल रहे हैं। झील का रंग गहरा होना उसकी अस्थिरता का संकेत है, जिससे नेपाल के लिए एक नया और गंभीर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है, जो पहले से ही विनाशकारी बाढ़ से जूझ रहा है जिसमें 580 से अधिक लोगों की जान चली गई है। चीनी अधिकारी ड्रोन और उपग्रहों के माध्यम से स्थिति की गहन निगरानी कर रहे हैं और निचले इलाकों में रहने वाले समुदायों को सतर्क रहने का आग्रह किया है।

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  • चीन ने नेपाल को ल्हन्दे नदी के ऊपरी हिस्से में स्थित एक अस्थिर ग्लेशियर झील के बारे में चेतावनी दी है, जिसके कभी भी फटने का खतरा है।
  • हिमखंड टूटने से बनी यह झील तेजी से पानी जमा कर रही है, और इसका रंग गहरा होना अस्थिरता का एक प्रमुख संकेतक है।
  • यह नया खतरा ऐसे समय आया है जब नेपाल पहले से ही व्यापक बाढ़ से जूझ रहा है, जिसमें 587 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लापता हैं।
  • चीन ड्रोन और उपग्रह निगरानी कर रहा है और संभावित बाढ़ के प्रभावों का मॉडल तैयार किया है।
  • नेपाल के निचले इलाकों में रहने वाले समुदायों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

काठमांडू, नेपाल – आपदाग्रस्त नेपाल के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, पड़ोसी चीन ने ल्हन्दे नदी के ऊपरी हिस्सों में तेजी से बन रही एक ग्लेशियर झील के संबंध में तत्काल चेतावनी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि यह किसी भी समय फट सकती है। यह भयावह संदेश ऐसे समय में आया है जब नेपाल पहले से ही भीषण बाढ़ से जूझ रहा है, जिसमें 587 लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं, जो हिमालयी क्षेत्र के सामने मौजूद अस्थिर पर्यावरणीय चुनौतियों को उजागर करता है।

चीनी संचार के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से बन रही यह झील अपने पानी के रंग में लगातार गहरापन दिखा रही है, जो बढ़ती अस्थिरता और आसन्न दरार की संभावना का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। हालांकि चीनी अधिकारियों ने संकेत दिया है कि पानी की तात्कालिक मात्रा निचले इलाकों की नदियों में भारी उछाल का कारण नहीं बन सकती है, फिर भी उन्होंने निचले तटीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है।

इस खतरनाक झील की उत्पत्ति ऊपरी हिस्से में हुई एक हिमनदी घटना में निहित है। ल्हन्दे नदी के ऊपरी हिस्से में एक बड़े हिमखंड के टूटने से पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित हो गया, जिससे यह अस्थिर झील बन गई। स्थिति को और बदतर बनाते हुए, छोछेन नदी (चीन की ओर) और पुरेपु नदी (नेपाल की ओर) का संगम भी हाल की बाढ़ गतिविधि से आए मलबे से अवरुद्ध हो गया है, जिससे पानी का जमाव बढ़ रहा है।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, इस नई झील में जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार तक, अनुमानित 2.5 मिलियन घन मीटर पानी जमा हो चुका था, और अनुमान है कि अगले तीन दिनों में अतिरिक्त 3 मिलियन घन मीटर पानी जमा हो सकता है। यह तेजी से जमाव जोखिम को बढ़ाता है, इसके बावजूद चीन का वर्तमान आकलन है कि आंशिक दरार से अधिकतम 500 घन मीटर प्रति सेकंड का प्रवाह हो सकता है, जो मुख्य रूप से नदी के किनारों तक ही सीमित रहेगा।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि ग्लेशियर झील फटने से आने वाली बाढ़ (GLOFs) हिमालय में सबसे महत्वपूर्ण और अप्रत्याशित प्राकृतिक खतरों में से एक है, एक ऐसा क्षेत्र जो जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। तिब्बती पठार से निकलने वाली नदियों की सीमा पार प्रकृति का अर्थ है कि चीन में होने वाली घटनाएं नेपाल जैसे निचले देशों को सीधे प्रभावित करती हैं। यह विशेष चेतावनी मजबूत सीमा पार प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और सहयोगात्मक आपदा प्रबंधन रणनीतियों की महत्वपूर्ण आवश्यकता को रेखांकित करती है। नेपाल में पहले से ही गंभीर बाढ़ की स्थिति को GLOF के संभावित रूप से और खराब करने की संभावना पर्यावरणीय गिरावट और जलवायु परिवर्तन के मानवीय जीवन और बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाले प्रभावों को उजागर करती है।

"हिमालय में ग्लेशियर झील फटने से आने वाली बाढ़ की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता जलवायु परिवर्तन के कमजोर समुदायों और पारिस्थितिक तंत्रों पर पड़ने वाले तत्काल और विनाशकारी प्रभाव की एक कड़ी याद दिलाती है।"

संभावित क्षति को कम करने और समय पर चेतावनी प्रदान करने के लिए, चीन उन्नत निगरानी तकनीकों का उपयोग कर रहा है। पूरे प्रभावित क्षेत्र की ड्रोन और उपग्रह निगरानी के माध्यम से लगातार जांच की जा रही है। इसके अलावा, संभावित प्रभावों का आकलन करने और तैयारी उपायों को सूचित करने के लिए परिष्कृत बाढ़ मॉडलिंग की गई है। चीन द्वारा यह सक्रिय दृष्टिकोण नेपाल के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर तत्काल खतरे और चल रहे मानवीय संकट को देखते हुए।

नेपाल पहले ही भारी चुनौतियों का सामना कर चुका है, जिसमें पहले की रिपोर्टों से पता चला था कि 149 भारतीय नागरिक सुरक्षित लौट आए और महाराष्ट्र के 37 तीर्थयात्री बाढ़ के बीच काठमांडू पहुंचे। इस आपदा में जलविद्युत सुरंगों में फंसे मजदूर भी शामिल थे, जिसके लिए सहायता का अनुरोध किया गया था। चीन की नई चेतावनी नेपाल के पहले से ही तनावपूर्ण आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रयासों में एक और जटिलता जोड़ती है, जिसमें सभी हितधारकों से अत्यधिक सतर्कता की मांग की गई है।

क्या आप जानते हैं?: ग्लेशियर झील फटने से आने वाली बाढ़ (GLOFs) ग्लेशियर झीलों से पानी का अचानक निकलना है, जो अक्सर प्राकृतिक बांधों (मोरेन या बर्फ) की विफलता के कारण होता है, और यह निचले इलाकों में पानी और मलबे के विनाशकारी प्रवाह को छोड़ सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: ग्लेशियर झील फटने से आने वाली बाढ़ (GLOF) क्या है?
GLOF एक ग्लेशियर झील में जमा पानी की एक महत्वपूर्ण मात्रा का अचानक और तेजी से निकलना है। ये झीलें आमतौर पर पिघले पानी से बनती हैं जो बर्फ या ग्लेशियर मलबे (मोरेन) के प्राकृतिक बांधों के पीछे फंस जाता है, जो भूकंपीय गतिविधि, भूस्खलन या तेजी से पिघलने जैसे कारकों के कारण विफल हो सकते हैं।

प्रश्न 2: चीन इस संकट में नेपाल की कैसे मदद कर रहा है?
चीन नेपाल को अस्थिर ग्लेशियर झील के संबंध में महत्वपूर्ण प्रारंभिक चेतावनी जानकारी प्रदान कर रहा है। यह ड्रोन और उपग्रहों का उपयोग करके प्रभावित क्षेत्र की सक्रिय रूप से निगरानी भी कर रहा है, बाढ़ मॉडलिंग कर रहा है, और झील फटने के संभावित प्रभावों के लिए नेपाल को तैयार करने और उन्हें कम करने में मदद करने के लिए डेटा साझा कर रहा है।