कोयंबटूर में कृष्णाम्पथी झील की मुख्य जल आपूर्ति नाली में कचरा जमा होने से जल प्रवाह बाधित हो रहा है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य और जल गुणवत्ता पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो रहा है। स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ता और नगर निगम इस समस्या के समाधान हेतु तेज कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Key Takeaways)
- कृष्णाम्पथी झील के प्रमुख जल चैनल में कचरा जमा
- जल प्रवाह में बाधा और जल गुणवत्ता का गिरावट
- स्वास्थ्य जोखिम और नगर निगम की कठोर कार्रवाई की मांग
कोयंबटूर के मारुधामलाई पहाड़ियों से निकलने वाले करपरायन नाली, जो कृष्णाम्पथी झील को जल आपूर्ति करती है, में हाल ही में बड़े पैमाने पर कचरा फेंका जा रहा है। यह नाली, जो वैधवली, लिंगनूर और सीरनाइकनपलयाम जैसे क्षेत्रों से गुजरती है, मौसमी रूप से अक्सर सूखी रहती है, परंतु जब बारिश का जल बहता है तो यह जल स्रोत का मुख्य प्रवेश द्वार बन जाता है।
पर्यावरणीय चिंताएँ और स्थानीय प्रभाव
पर्यावरण कार्यकर्ता के. मोहनराज ने बताया कि करपरायन नाली के अलावा कोइलमेड़ू नाम की एक छोटी नाली भी झील को पोषित करती है, पर करपरायन ही प्रमुख है। इस नाली में घरों और छोटे व्यापारियों द्वारा ठोस कचरा, प्लास्टिक बोतलें और यहाँ‑तक कि खांसी की सिरप की बोतलें फेंके जाने से जल प्रवाह रुक रहा है। इससे जल की गति धीमी हो गई है, जिससे जल में ठहराव बना और मच्छरों की जनसंख्या बढ़ी।
स्वास्थ्य जोखिम और सार्वजनिक प्रतिक्रिया
एनजीओ अनिवर आमिप्पु के आर. संथाकुमार ने बताया कि सरकार लॉ कॉलेज के पास बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा जमा हो गया है, जिससे जलधारा पूरी तरह बंद हो गई। ठहराव वाला जल रोगजीनों के लिए आदर्श प्रजनन स्थल बनता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित रोगों का खतरा बढ़ता है। स्थानीय निवासी अब न केवल जल की कमी, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से भी परेशान हैं।
नगर निगम की प्रतिक्रिया
कोयंबटूर कॉरपोरेशन ने बताया कि वार्ड 75 में नेताजी मेन रोड के पास एस.एन. पालयम के निकट कचरा डंपिंग की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की गई। निरीक्षण के दौरान दोषी को पहचान कर ₹10,000 का जुर्माना लगाया गया और भविष्य में इस प्रकार की अवैध डंपिंग को रोकने के लिए और कड़े निरीक्षण किए जाएंगे। अधिकारियों ने दोहराव वाले अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई।
भविष्य की दिशा
विशेषज्ञों का कहना है कि सतत जल प्रबंधन के लिए केवल दंडात्मक उपाय पर्याप्त नहीं हैं; निवारक उपाय जैसे जागरूकता कार्यक्रम, कचरा प्रबंधन प्रणाली का सुदृढ़ीकरण और समुदाय-आधारित सफाई अभियानों को तेज़ी से लागू करना आवश्यक है। यदि इन पहलों को अनदेखा किया गया तो कोयंबटूर की जलस्रोत भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट का सामना कर सकते हैं।