भारत सरकार ने टाइगर रिज़र्व के बाहर रहने वाले बाघों के प्रबंधन के लिए 'टाइगर आउटसाइड टाइगर रिज़र्व' (TOTR) पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य मानव-बाघ संघर्ष को कम करना और वैज्ञानिक तरीके से बाघों का संरक्षण करना है।

मुख्य बातें

  • भारत के लगभग 35-40% बाघ अब टाइगर रिज़र्व के बाहर रहते हैं।
  • TOTR पहल का उद्देश्य मानव जीवन की सुरक्षा के साथ बाघों का संरक्षण करना है।
  • 9 राज्यों के 40 वन प्रभागों को इस पायलट प्रोजेक्ट के लिए चुना गया है।
  • तकनीक (AI, ड्रोन) और सामुदायिक भागीदारी पर विशेष जोर दिया जाएगा।

भारत की बाघ संरक्षण यात्रा दुनिया के सबसे सफल वन्यजीव पुनरुद्धार में से एक मानी जाती है। 1973 में 'प्रोजेक्ट टाइगर' की शुरुआत से लेकर अब तक, देश की बाघ संख्या 1,411 (2006) से बढ़कर 3,682 (2022) हो गई है। हालांकि, इस सफलता ने एक नई चुनौती को जन्म दिया है: बाघों का सुरक्षित क्षेत्रों से बाहर निकलकर मानव बस्तियों के करीब आना।

एक नई चुनौती: रिज़र्व के बाहर बाघ

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के अनुसार, भारत की बाघ आबादी का 35-40% हिस्सा अब निर्धारित टाइगर रिज़र्व की सीमाओं के बाहर रहता है। जैसे-जैसे बाघों की संख्या बढ़ रही है, उनके प्राकृतिक आवास (Home Ranges) भर रहे हैं, जिससे बाघ स्वाभाविक रूप से नए क्षेत्रों की तलाश में रिज़र्व से बाहर निकल रहे हैं। यह स्थिति गांवों, खेतों और सड़कों के पास रहने वाले लोगों के लिए जोखिम पैदा करती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि बाघों का रिज़र्व से बाहर निकलना केवल एक पारिस्थितिक घटना नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक-आर्थिक मुद्दा भी है। जब बाघ मानव बस्तियों में प्रवेश करते हैं, तो इससे न केवल पशुधन का नुकसान होता है, बल्कि मानव जीवन को भी खतरा होता है, जिससे स्थानीय समुदायों में वन्यजीवों के प्रति आक्रोश पैदा हो सकता है।

बाघों का संरक्षण केवल जंगलों तक सीमित नहीं रह सकता; अब हमें साझा परिदृश्यों (Shared Landscapes) में उनके साथ रहने की कला सीखनी होगी।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस समस्या से निपटने के लिए 'टाइगर आउटसाइड टाइगर रिज़र्व' (TOTR) पहल शुरू की है। यह पहल केवल संकट आने पर प्रतिक्रिया देने के बजाय, तकनीक और विज्ञान के माध्यम से संकट को रोकने पर केंद्रित है।

TOTR के दो मुख्य स्तंभ

यह कार्यक्रम दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ मानव-बाघ संघर्ष को कम करने और फील्ड सुरक्षा को मजबूत करने पर केंद्रित है, जिसमें रैपिड रिस्पांस टीमों और बेहतर संचार प्रणालियों की तैनाती शामिल है। दूसरा स्तंभ दीर्घकालिक सह-अस्तित्व पर जोर देता है, जिसमें स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रक्रिया में भागीदार बनाना और समय पर मुआवजा देना शामिल है।

विशेषतापारंपरिक संरक्षण (Project Tiger)नई पहल (TOTR)
मुख्य फोकससंरक्षित क्षेत्रों के भीतर सुरक्षारिज़र्व के बाहर सह-अस्तित्व
दृष्टिकोणप्रतिक्रियाशील (Reactive)सक्रिय और वैज्ञानिक (Proactive)
सामुदायिक भूमिकासीमित भागीदारीसक्रिय भागीदार और रक्षक
क्या आप जानते हैं?: भारत दुनिया के 70% से अधिक जंगली बाघों का घर है, जो एक वैश्विक स्तर की उपलब्धि है।

Frequently Asked Questions

1. TOTR पहल के तहत किन राज्यों को शामिल किया गया है?
उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और असम को पायलट चरण के लिए चुना गया है।

2. इस पहल में तकनीक का क्या उपयोग होगा?
निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के लिए कैमरा ट्रैप, ड्रोन, GPS और AI का उपयोग किया जाएगा।