तिरुचि नगर निगम ने लैंडफिल का बोझ कम करने के लिए गैर-पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक को सीमेंट कारखानों में ईंधन के रूप में भेजने की अपनी पहल तेज कर दी है। जुलाई 2024 से अब तक लगभग 4,000 टन प्लास्टिक को सीमेंट भट्टियों में रिफ्यूज-डिराइव्ड फ्यूल (RDF) के रूप में उपयोग किया जा चुका है।

मुख्य बातें

  • जुलाई 2024 से 4,000 टन प्लास्टिक कचरे को सीमेंट कारखानों में भेजा गया।
  • गैर-पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक का उपयोग अब ईंधन (RDF) के रूप में किया जा रहा है।
  • नगर निगम ने कचरा संग्रह के लिए GPS ट्रैकिंग और चार-बिन प्रणाली लागू की है।

तिरुचि नगर निगम ने शहर के लैंडफिल पर बढ़ते बोझ को कम करने के उद्देश्य से गैर-पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक कचरे के निपटान के प्रयासों को काफी तेज कर दिया है। निगम की इस नई रणनीति के तहत, सिंगल-यूज़ प्लास्टिक जैसे स्नैक पैकेट, कैरी बैग और डिस्पोजेबल कटलरी को सीमेंट भट्टियों में ईंधन के रूप में उपयोग करने के लिए भेजा जा रहा है।

शहर में प्रतिदिन लगभग 450 से 470 टन कचरा उत्पन्न होता है, जिसमें से लगभग 70% का स्रोत पर ही पृथक्करण (segregation) किया जाता है। नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के तहत लागू की गई चार-बिन प्रणाली के माध्यम से निगम को कचरा पृथक्करण में और अधिक सुधार की उम्मीद है। घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से एकत्र किया गया कचरा पहले माइक्रो कंपोस्ट सेंटरों (MCCs) और रिसोर्स रिकवरी सेंटरों (RRCs) में भेजा जाता है, जहाँ कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) मॉडल न केवल कचरे के प्रबंधन में मदद करते हैं, बल्कि पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता को भी कम करते हैं। प्लास्टिक को सीमेंट कारखानों में 'रिफ्यूज-डिराइव्ड फ्यूल' (RDF) के रूप में उपयोग करना एक टिकाऊ समाधान है जो लैंडफिल में कचरे के ढेर को रोकने में मदद करता है।

प्लास्टिक कचरे को ऊर्जा में बदलना शहरी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, जुलाई 2024 से अब तक लगभग 4,000 टन प्लास्टिक को सीमेंट कारखानों में भेजा जा चुका है। कचरा ढोने वाले ट्रकों ने अब तक 454 यात्राएं पूरी की हैं, जिनमें से प्रत्येक ट्रक 8 से 10 टन प्लास्टिक कचरा लेकर जाता है। निगम ने कचरा संग्रह वाहनों को GPS ट्रैकिंग डिवाइस से भी लैस किया है ताकि उनकी निगरानी की जा सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पारंपरिक रूप से, शहरी कचरे का प्रबंधन केवल लैंडफिल में कचरा डंप करने तक सीमित था। हालांकि, बढ़ते प्रदूषण के कारण, अब भारत के कई शहर 'वेस्ट-टू-एनर्जी' (Waste-to-Energy) मॉडल की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ कचरे को उपयोगी संसाधनों में बदला जाता है।

क्या आप जानते हैं?: सीमेंट भट्टियों में प्लास्टिक का उपयोग करने से कोयले जैसे पारंपरिक ईंधन की खपत में कमी आती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: प्लास्टिक को सीमेंट कारखानों में क्यों भेजा जा रहा है?
उत्तर: क्योंकि गैर-पुनर्चक्रण योग्य प्लास्टिक को सीमेंट भट्टियों में ईंधन (RDF) के रूप में प्रभावी ढंग से जलाया जा सकता है।

प्रश्न 2: तिरुचि नगर निगम कचरा प्रबंधन को कैसे ट्रैक कर रहा है?
उत्तर: निगम ने कचरा संग्रह वाहनों में GPS ट्रैकिंग सिस्टम स्थापित किया है।