भारत में बढ़ते शहरी कचरे को महत्वपूर्ण खनिजों के स्रोत में बदलने का समाधान शहरी खनन है, जो आर्थिक, पर्यावरणीय और रणनीतिक लाभ प्रदान करता है। यह लेख इस नई अवधारणा की पृष्ठभूमि, प्रमुख स्रोत और भविष्य की संभावनाओं को विस्तार से बताता है।

मुख्य बिंदु

  • शहरी खनन कचरे से लिथियम, कोबाल्ट आदि जैसे महत्वपूर्ण खनिज निकालता है।
  • भारत में 2023-24 में 17.5 लाख टन ई‑वेस्ट उत्पन्न हुआ।
  • आधुनिक शहरी खनन घरेलू रोजगार और संसाधन सुरक्षा बढ़ाता है।

शहरी खनन क्या है?

शहरी खनन शहरों में उत्पन्न इलेक्ट्रॉनिक कचरा, निर्माण‑विनाश कचरा और पुराने वाहन आदि से मूल्यवान सामग्री पुनः प्राप्त करने की प्रक्रिया है। यह शब्द 1980‑के दशक में जापान के प्रोफेसर हिदेओ नंज्यो ने प्रस्तुत किया और आज सर्कुलर इकॉनमी का मुख्य स्तम्भ बन गया है।

मुख्य स्रोत और वर्तमान आँकड़े

ई‑वेस्ट विश्व स्तर पर 2022 में 62 मिलियन टन उत्पन्न हुआ, जिसमें से केवल 22.3% ही पुनर्चक्रित हुआ। भारत ने 2023‑24 में 17,51,236 टन ई‑वेस्ट उत्पन्न किया। निर्माण‑विनाश कचरा (C&D) का वैश्विक उत्पादन 2‑3 बिलियन टन है, परन्तु केवल 22.44% ही पुनः उपयोग हो पाता है। पुराने वाहन (ELVs) भी बड़ी मात्रा में स्टील, एल्यूमीनियम व प्लैटिनम‑समूह धातु प्रदान करते हैं।

इतिहासिक पृष्ठभूमि

परम्परागत खनन ने सदियों से प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव डाला है, जबकि शहरीकरण की तेज गति ने कचरे की मात्रा को अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया। 1990 के दशक में यूरोप में इलेक्ट्रॉनिक कचरे के पुनर्चक्रण पर पहल शुरू हुई, जिससे आज शहरी खनन एक वैश्विक आंदोलन बन गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि शहरी खनन न केवल भारत की आयात निर्भरता को घटाता है, बल्कि स्थानीय रोजगार सृजन, पर्यावरणीय गिरावट में कमी और सर्कुलर इकॉनमी को तेज़ी से लागू करने में भी मदद करता है।

"शहरी खनन भारत की रणनीतिक संसाधन सुरक्षा का भविष्य है," कहते हैं डॉ. अंजलि मिश्रा, पर्यावरण विज्ञान में प्रोफेसर।
क्या आप जानते हैं?: 2025 में यूरोप ने अपने कुल कचरे का 45% पुनः उपयोग कर आर्थिक लाभ में $120 बिलियन जोड़ दिया।

Frequently Asked Questions

शहरी खनन में कौन‑कौन सी तकनीकें उपयोग होती हैं? इलेक्ट्रो‑मैग्नेटिक पृथक्करण, हाइड्रोमैटिक लीकिंग और बायो‑लेजिंग जैसी उन्नत प्रक्रियाएँ प्रमुख हैं।

क्या शहरी खनन भारत में बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है? हाँ, सरकारी नीतियों, निजी‑सार्वजनिक भागीदारी और निवेश प्रोत्साहनों से यह संभव है।