शेनझेन में आयोजित एशिया-प्रशांत युवा सम्मेलन में 13 देशों के प्रतिनिधियों ने हरित ऊर्जा और डिजिटल बुनियादी ढांचे के माध्यम से एक साझा भविष्य बनाने पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और AI-ऊर्जा तालमेल को विकास की कुंजी बताया।
- 13 एशिया-प्रशांत देशों के युवा नेताओं ने शेनझेन में हरित ऊर्जा पर चर्चा की।
- गुआंगडोंग-हांगकांग-मकाओ ग्रेटर बे एरिया 2030 तक 60% हरित बिजली का लक्ष्य रखता है।
- चीन-लाओस इंटरकनेक्शन प्रोजेक्ट सालाना 3 बिलियन kWh स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करता है।
- क्षेत्रीय विकास के लिए बिजली और कंप्यूटिंग शक्ति के बीच तालमेल पर जोर।
चीन के शेनझेन में आयोजित 'एशिया-प्रशांत युवा सम्मेलन: ऊर्जा के माध्यम से एक साझा भविष्य का निर्माण' एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ है। इस कार्यक्रम में 13 एशिया-प्रशांत देशों और क्षेत्रों के युवा नेताओं, विद्वानों और पत्रकारों ने भाग लिया, जिसका उद्देश्य सतत विकास और हरित ऊर्जा संक्रमण के लिए सामूहिक समाधान खोजना था।
सम्मेलन के दौरान, प्रतिभागियों ने 110 kV चुनहुई सबस्टेशन का दौरा किया, जो देश का पहला शून्य-कार्बन स्मार्ट शैक्षिक सबस्टेशन है। इस यात्रा ने युवाओं को शेनझेन के औद्योगिक परिवर्तन और हरित ऊर्जा लेआउट को करीब से देखने का अवसर दिया। विशेषज्ञों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे तकनीकी नवाचार ऊर्जा वितरण को अधिक कुशल बना सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केवल सरकारी नीतियां पर्याप्त नहीं हैं; इसके लिए युवा नवाचार और अंतर-क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता है। यह सम्मेलन इस बात का प्रमाण है कि भविष्य की ऊर्जा अर्थव्यवस्था डिजिटल बुनियादी ढांचे और हरित ग्रिड के एकीकरण पर टिकी है।
हरित और कम कार्बन वाला संक्रमण सरकारों, निजी उद्यमों और समुदायों के समन्वित प्रयासों की मांग करता है।
चैंबर ऑफ कॉमर्स और विभिन्न मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने साझा किया कि कैसे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, जैसे कि चीन-लाओस 500 kV इंटरकनेक्शन प्रोजेक्ट, ऊर्जा विनिमय क्षमता को 50,000 किलोवाट से बढ़ाकर 1.5 मिलियन किलोवाट कर सकता है। यह परियोजना सालाना 3 बिलियन kWh स्वच्छ बिजली प्रदान करने में सक्षम है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक गेम-चेंजर है।
डिजिटल युग में, बिजली और कंप्यूटिंग शक्ति के बीच तालमेल एक नया आयाम पेश कर रहा है। नान्यांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर वांग हाई ने सुझाव दिया कि हमें बिजली की आपूर्ति को केवल एकतरफा नहीं, बल्कि बिजली और कंप्यूटिंग के बीच द्वि-मार्गी तालमेल के रूप में देखना चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
एशिया-प्रशांत क्षेत्र दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते आर्थिक क्षेत्रों में से एक है, लेकिन यह जलवायु परिवर्तन के प्रति भी अत्यधिक संवेदनशील है। पिछले दशक में, क्षेत्र ने कोयले से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव देखा है, जिसमें चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई देश अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।
Frequently Asked Questions
1. एशिया-प्रशांत युवा सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य हरित ऊर्जा, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और डिजिटल बुनियादी ढांचे के माध्यम से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए एक साझा भविष्य बनाना था।
2. ग्रेटर बे एरिया का ऊर्जा लक्ष्य क्या है?
2030 तक, गुआंगडोंग-हांगकांग-मकाओ ग्रेटर बे एरिया में लगभग 60 प्रतिशत बिजली हरित स्रोतों से आने का लक्ष्य है।