CAG की हालिया रिपोर्ट ने ग्रीन इंडिया मिशन की गंभीर विफलताओं को उजागर किया है, जहाँ सरकार वनों के पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने के बजाय केवल संख्यात्मक वृक्षारोपण पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
- ग्रीन इंडिया मिशन ने 1.4 मिलियन हेक्टेयर के लक्ष्य के मुकाबले केवल 0.11 मिलियन हेक्टेयर वन गुणवत्ता में सुधार किया।
- वन क्षेत्र के विस्तार का लक्ष्य मात्र 4% ही पूरा हो पाया है।
- सरकार 'वन बहाली' (Forest Restoration) के बजाय 'वृक्षारोपण' (Tree Plantation) को प्राथमिकता दे रही है।
भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) के प्रदर्शन ऑडिट ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। जिस योजना को भारत के वनों को पुनर्जीवित करने के लिए बनाया गया था, उसने एक दशक बाद भी अपने मूल उद्देश्यों को प्राप्त करने में लगभग कोई सफलता नहीं पाई है। रिपोर्ट के अनुसार, मिशन का लक्ष्य 1.4 मिलियन हेक्टेयर में वन गुणवत्ता में सुधार करना था, लेकिन वास्तव में केवल 0.11 मिलियन हेक्टेयर में ही सुधार हुआ, जो कि निर्धारित लक्ष्य के दसवें हिस्से से भी कम है।
यह मिशन 2008 में शुरू किए गए 'जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना' के आठ स्तंभों में से एक था। इसका मुख्य उद्देश्य पेरिस समझौते के तहत 2030 तक 2.5 से 3 बिलियन टन अतिरिक्त कार्बन सिंक बनाना था। हालांकि, CAMPA और MGNREGA जैसी योजनाओं के साथ जिस समन्वय (Convergence) की कल्पना की गई थी, वह कभी धरातल पर नहीं उतरा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत वर्तमान में 'इकोलॉजिकल रिस्टोरेशन' (पारिस्थितिक बहाली) और 'लैंडस्केपिंग' (सजावटी वृक्षारोपण) के बीच के अंतर को नजरअंदाज कर रहा है। सरकार का ध्यान अब 'एक पेड़ माँ के नाम' जैसे अभियानों पर केंद्रित है, जो संख्यात्मक रूप से प्रभावशाली दिखते हैं, लेकिन वैज्ञानिक रूप से एक संपूर्ण वन पारिस्थितिकी तंत्र का विकल्प नहीं हो सकते।
वृक्ष लगाना आसान है, लेकिन एक जीवित वन तंत्र को पुनर्जीवित करना एक जटिल जैविक प्रक्रिया है जिसे केवल आंकड़ों से नहीं मापा जा सकता।
अरावली पर्वतमाला इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है। खनन और विदेशी प्रजातियों (जैसे विलायती कीकर) के कारण नष्ट हो चुकी अरावली को अब एक 'ग्रीन वॉल' के माध्यम से बचाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि केवल नए पौधे लगाने से उन पारिस्थितिक तंत्रों को वापस नहीं लाया जा सकता जिन्हें बनने में हजारों साल लगे थे।
भारत स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023 के आंकड़े भी इसी विसंगति को दर्शाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, हरित क्षेत्र में 1,445 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि हुई, लेकिन इसमें से केवल 156 वर्ग किलोमीटर ही 'वास्तविक वन' हैं। शेष 1,289 वर्ग किलोमीटर केवल 'रिकॉर्डेड वनों के बाहर वृक्ष आवरण' है। इसका सीधा अर्थ है कि भारत में पेड़ तो बढ़ रहे हैं, लेकिन जंगल घट रहे हैं।
| पैरामीटर | लक्ष्य (GIM) | वास्तविक उपलब्धि |
|---|---|---|
| वन गुणवत्ता सुधार (हेक्टेयर) | 1.4 मिलियन | 0.11 मिलियन |
| वन क्षेत्र विस्तार (%) | 100% | ~4% |
| कार्बन सिंक लक्ष्य (2030) | 2.5-3 बिलियन टन | अत्यधिक पिछड़ा हुआ |
Frequently Asked Questions
1. ग्रीन इंडिया मिशन (GIM) का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका मुख्य उद्देश्य जैव विविधता, जल संचयन और कार्बन सिंक को बढ़ाकर भारत के वनों की गुणवत्ता और क्षेत्र में सुधार करना था।
2. CAG की रिपोर्ट में मुख्य समस्या क्या बताई गई है?
रिपोर्ट बताती है कि सरकार वन पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली के बजाय केवल वृक्षारोपण की संख्या गिनने पर ध्यान दे रही है।