नई दिल्ली में आयोजित BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों ने यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर टैक्स (CBAM) को एकतरफा और भेदभावपूर्ण बताया है। देशों ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए विकसित राष्ट्रों से अधिक वित्तीय सहायता की मांग की है।
- BRICS देशों ने यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) को 'संरक्षणवादी' करार दिया।
- भारत के स्टील निर्यात पर इस टैक्स का गहरा प्रभाव पड़ने की संभावना है।
- विकासशील देशों के लिए जलवायु अनुकूलन वित्त (Adaptation Finance) में भारी वृद्धि की मांग की गई।
- बैठक नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित की गई।
नई दिल्ली: BRICS देशों ने मंगलवार को यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBAM) जैसे जलवायु उपायों का कड़ा विरोध किया है। सदस्य देशों ने इन उपायों को 'एकतरफा, दंडात्मक, भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी' बताते हुए वैश्विक व्यापार और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए खतरा बताया है।
नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित 12वीं BRICS पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में यह संयुक्त बयान जारी किया गया। मंत्रियों ने विशेष रूप से चेतावनी दी कि कार्बन सीमा उपाय विकासशील देशों के जलवायु परिवर्तन से निपटने और लचीलापन बनाने के प्रयासों को कमजोर कर सकते हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यूरोपीय संघ का CBAM जनवरी 2026 से पूर्ण रूप से लागू हो चुका है। यह तंत्र लोहा, स्टील, एल्यूमीनियम, सीमेंट और उर्वरक जैसे कार्बन-गहन उत्पादों के आयातकों के लिए उत्पादन से जुड़ी कार्बन उत्सर्जन का हिसाब देना अनिवार्य बनाता है। यूरोपीय संघ का तर्क है कि यह 'कार्बन लीकेज' को रोकने के लिए है, लेकिन BRICS देशों का मानना है कि यह व्यापारिक बाधा है।
कार्बन सीमा कर विकासशील देशों के औद्योगिक विकास को बाधित कर सकते हैं और वैश्विक जलवायु न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
भारत के लिए यह मुद्दा अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि भारत के यूरोपीय संघ को होने वाले निर्यात में लोहा और स्टील का हिस्सा लगभग 90% है। हालिया शोध बताते हैं कि उच्च उत्सर्जन वाले भारतीय स्टील फर्मों ने पहले ही यूरोपीय बाजार में अपने निर्यात और राजस्व में कमी दर्ज की है।
अनुकूलन वित्त (Adaptation Finance) की मांग
BRICS मंत्रियों ने विकसित देशों से आग्रह किया कि वे जलवायु अनुकूलन के लिए वित्तीय सहायता में तत्काल वृद्धि करें। उन्होंने मांग की कि यह सहायता 'नई, अतिरिक्त, पूर्वानुमेय और सुलभ' होनी चाहिए। मंत्रियों ने 2025 के संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन में किए गए उस वादे को पूरा करने का भी आह्वान किया, जिसमें 2035 तक विकासशील देशों को अनुकूलन वित्त को तीन गुना करने की बात कही गई थी।
अनुकूलन वित्त का उपयोग उन समुदायों की मदद के लिए किया जाता है जो बाढ़, सूखे और अत्यधिक गर्मी जैसे जलवायु प्रभावों का सामना कर रहे हैं। भारत जैसे देशों के लिए, यह बुनियादी ढांचे और कृषि सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है।
Frequently Asked Questions
1. CBAM क्या है? यह यूरोपीय संघ का एक तंत्र है जो कार्बन-गहन उत्पादों के आयात पर कर लगाता है ताकि उत्पादन के दौरान उत्सर्जन को नियंत्रित किया जा सके।
2. भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? भारत के स्टील और एल्यूमीनियम निर्यात पर इसका बड़ा आर्थिक प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि इन उत्पादों में कार्बन उत्सर्जन अधिक होता है।