टिमोरो ग्रीन पिजन की आबादी में भारी गिरावट देखी गई है, जिससे यह प्रजाति विलुप्ति की कगार पर पहुँच गई है। शिकार और आवास के विनाश ने इस दुर्लभ पक्षी के अस्तित्व को गंभीर खतरे में डाल दिया है।

  • टिमोरो ग्रीन पिजन की वैश्विक आबादी अब मात्र 100 से 500 के बीच रह गई है।
  • मुख्य कारण: अत्यधिक शिकार और 80% से अधिक प्राकृतिक आवास का विनाश।
  • इंडोनेशिया में यह प्रजाति लगभग कार्यात्मक रूप से विलुप्त मानी जा रही है।

पूर्वी इंडोनेशिया और तिमोर-लेस्ते के द्वीपों पर पाया जाने वाला दुर्लभ टिमोरो ग्रीन पिजन (Timor green pigeon) अब विलुप्ति की कगार पर खड़ा है। एक हालिया अध्ययन के अनुसार, दुनिया भर में इस प्रजाति के केवल 100 से 500 वयस्क पक्षी ही बचे हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस प्रजाति को IUCN रेड लिस्ट में 'लुप्तप्राय' (Endangered) से बदलकर 'गंभीर रूप से लुप्तप्राय' (Critically Endangered) श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

शिकार और व्यवहारिक कमजोरी: एक घातक संयोजन

इस पक्षी के विलुप्त होने का एक बड़ा कारण इनका अनोखा व्यवहार है। वन्यजीव फोटोग्राफर और पर्यावरणविद् इंद्रजीत घोरपड़े के अनुसार, ये पक्षी शिकार के प्रति बहुत कम प्रतिक्रिया देते हैं। स्थानीय लोग इन्हें 'तुले' (Tule) कहते हैं, जिसका अर्थ है 'बहरा'। जब एक पक्षी को गोली मारी जाती है, तो बाकी झुंड घबराकर भागने के बजाय पेड़ों की ऊंचाइयों पर ही बैठे रहते हैं, जिससे शिकारी एक ही बार में कई पक्षियों को मार गिराते हैं।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि टिमोरो ग्रीन पिजन का संकट केवल एक पक्षी की समस्या नहीं है, बल्कि यह हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के टूटने का संकेत है। जब एक विशिष्ट प्रजाति का आवास 80% से अधिक नष्ट हो जाता है, तो यह पूरे खाद्य चक्र को अस्थिर कर देता है।

टिमोरो ग्रीन पिजन उन प्रजातियों में से एक है जो पूरी तरह से मानव निर्मित कारणों से विलुप्त होने की ओर बढ़ रही है।

आवास का विखंडन (Habitat Fragmentation) भी एक गंभीर समस्या है। जैसे-जैसे जंगल छोटे टुकड़ों में बंट रहे हैं, इन पक्षियों के लिए प्रजनन करना और जीन पूल को बनाए रखना कठिन होता जा रहा है। इससे आने वाली पीढ़ियां कमजोर और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो रही हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ऐतिहासिक रूप से, ये पक्षी तिमोर, रोट और आसपास के द्वीपों के निचले इलाकों के वनों में प्रचुर मात्रा में पाए जाते थे। ये मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में रहते थे जहाँ फल देने वाले पेड़ प्रचुर मात्रा में हों। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में बढ़ती मानवीय गतिविधियों ने इनके प्राकृतिक निवास को लगभग समाप्त कर दिया है।

Did You Know?: टिमोरो ग्रीन पिजन को 'तुले' कहा जाता है क्योंकि वे गोली चलने की आवाज सुनकर भी उड़ने के बजाय शांत बैठे रहते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: टिमोरो ग्रीन पिजन के विलुप्त होने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मुख्य कारणों में आवास का विनाश (80% से अधिक) और शिकार शामिल है।

प्रश्न 2: वर्तमान में इनकी अनुमानित संख्या कितनी है?
उत्तर: शोधकर्ताओं का अनुमान है कि दुनिया भर में केवल 100 से 500 पक्षी ही बचे हैं।