राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत किए गए विश्लेषण में केरल की छह नदियों में मल प्रदूषण (faecal contamination) के अत्यधिक स्तर का पता चला है। कुछ हिस्सों में प्रदूषण का स्तर निर्धारित सीमा से सैकड़ों गुना अधिक पाया गया है।

  • केरल की छह प्रमुख नदियों—करमना, पेरियार, कदम्बरायार, चित्रपुझा, चालाकुडी और कल्लई—में मल प्रदूषण का स्तर अत्यधिक पाया गया है।
  • चित्रपुझा नदी के इरुम्पनम क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर 5.5 लाख MPN प्रति 100 मिलीलीटर तक पहुंच गया, जो सुरक्षित सीमा से बहुत अधिक है।
  • विशेषज्ञों ने इसका मुख्य कारण अनुपचारित घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट का नदियों में सीधे बहाव को बताया है।

केरल की जीवनरेखा मानी जाने वाली नदियों की स्थिति अत्यंत चिंताजनक हो गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत किए गए हालिया विश्लेषण से पता चला है कि राज्य की छह प्रमुख नदियों में मल प्रदूषण (faecal contamination) का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, करमना, पेरियार, कदम्बरायार, चित्रपुझा, चालाकुडी और कल्लई नदियों के प्रदूषित हिस्सों में 'कुल कोलीफॉर्म' (total coliform) की संख्या फरवरी से मई 2026 के बीच 4,500 MPN से लेकर 5.5 लाख MPN प्रति 100 मिलीलीटर तक दर्ज की गई। गौरतलब है कि CPCB के मानकों के अनुसार, स्नान योग्य पानी के लिए कोलीफॉर्म की अधिकतम स्वीकार्य सीमा 2,500 MPN प्रति 100 मिलीलीटर से कम होनी चाहिए।

प्रदूषण के मुख्य आंकड़े

डेटा का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि प्रदूषण का स्तर अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग है। चित्रपुझा नदी के इरुम्पनम क्षेत्र में सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा 5.5 लाख MPN दर्ज किया गया। वहीं, पेरियार नदी के एलूवर और पाथलम क्षेत्रों में भी कोलीफॉर्म का स्तर काफी अधिक रहा। पाथलम के पास औद्योगिक क्षेत्र में यह स्तर 2.5 लाख MPN तक पहुंच गया था।

नदी का नामअधिकतम दर्ज कोलीफॉर्म (MPN/100ml)स्थिति
चित्रपुझा (इरुम्पनम)5,50,000अत्यधिक खतरनाक
कल्लई नदी2,00,000गंभीर
पेरियार (पाथलम)2,50,000गंभीर
करमना (मूनट्टुमक्कू)27,000चिंताजनक

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि नदियों में इस तरह का भारी प्रदूषण न केवल जलीय जीवन को नष्ट कर रहा है, बल्कि स्थानीय समुदायों के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की उपस्थिति सीधे तौर पर मानव मल के पानी में मिलने का संकेत देती है, जिससे हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियां फैल सकती हैं।

घरों और टाउनशिप से निकलने वाले अनुपचारित कचरे का नालों के माध्यम से नदियों में सीधा बहाव इस संकट का मुख्य कारण है।

कोचीन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CUSAT) के प्रोफेसर वी. शिवनंदन अचारी ने बताया कि सीवेज प्रबंधन में खामियों और अनियंत्रित अपशिष्ट प्रवाह के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। स्थानीय स्वशासन विभाग ने अब अवैध रूप से अपशिष्ट बहाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

केरल की नदियां ऐतिहासिक रूप से कृषि और घरेलू उपयोग के लिए महत्वपूर्ण रही हैं। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में शहरीकरण और औद्योगिक विस्तार के कारण जल प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गया है, जिससे पारिस्थितिक तंत्र असंतुलित हो गया है।

Did You Know?: कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पानी में प्रदूषण का एक प्रमुख संकेतक है, जो यह बताता है कि पानी पीने या नहाने के लिए सुरक्षित नहीं है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: कोलीफॉर्म का स्तर क्या दर्शाता है?
उत्तर: कोलीफॉर्म का उच्च स्तर पानी में मल या सीवेज के मिश्रण को दर्शाता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।

प्रश्न 2: सुरक्षित कोलीफॉर्म सीमा क्या है?
उत्तर: CPCB के अनुसार, स्नान योग्य पानी के लिए यह सीमा 2,500 MPN प्रति 100 मिलीलीटर से कम होनी चाहिए।