नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली जल बोर्ड को वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण के नियमों के उल्लंघन पर चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। ट्रिब्यूनल ने जल प्रदूषण और दोषपूर्ण प्रणालियों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है।
- NGT ने दिल्ली जल बोर्ड को चार सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया है।
- वर्षा जल संचयन प्रणालियों को ड्रेनेज के पास लगाने से भूजल प्रदूषण का खतरा है।
- पाइज़ोमीटर और प्रदूषक पृथक्करण प्रणालियों की कमी पर सवाल उठाए गए हैं।
- अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने दिल्ली में वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting) और भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) के दिशा-निर्देशों के पालन में गंभीर चूक का संज्ञान लेते हुए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को कड़ी फटकार लगाई है। ट्रिब्यूनल की अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य अफरोज अहमद कर रहे हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए, ट्रिब्यूनल ने दिल्ली जल बोर्ड को चार सप्ताह के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई एक निष्पादन आवेदन के बाद की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि ट्रिब्यूनल के पिछले आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली में गिरता भूजल स्तर एक आपातकालीन स्थिति है। यदि वर्षा जल संचयन प्रणालियों को स्टॉर्म वॉटर ड्रेन (Storm Water Drains) के पास स्थापित किया जाता है, तो इससे दूषित पानी सीधे जमीन के नीचे चला जाता है, जिससे पीने योग्य भूजल भी प्रदूषित हो सकता है।
आरोपियों का दावा है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और नगर निगम (MCD) जैसी संस्थाएं भी इन दिशा-निर्देशों की अनदेखी कर रही हैं। विशेष रूप से, भूजल दबाव मापने के लिए 'पाइज़ोमीटर' लगाने और प्रदूषकों को हटाने के लिए 'सेपरेटर' लगाने के आदेशों का उल्लंघन किया गया है।
गलत तरीके से बनाए गए रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम शहर के जल स्तर को सुधारने के बजाय उसे जहरीला बना सकते हैं।
इसके अलावा, रिचार्ज बोरवेल की गहराई को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। नियमों के अनुसार, बोरवेल को स्थिर जल स्तर से पांच मीटर ऊपर होना चाहिए, लेकिन आरोप है कि कई बोरवेल निर्धारित सीमा से कहीं अधिक गहरे हैं, जो पारिस्थितिक संतुलन को बिगाड़ सकते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
दिल्ली दशकों से गंभीर भूजल संकट से जूझ रही है। अत्यधिक दोहन और अनियंत्रित शहरीकरण के कारण जल स्तर खतरनाक रूप से नीचे चला गया है। NGT ने पिछले कुछ वर्षों में कई बार वर्षा जल संचयन को अनिवार्य करने और इसके सख्त कार्यान्वयन के आदेश दिए हैं ताकि भविष्य के जल संकट को टाला जा सके।
Frequently Asked Questions
1. NGT ने दिल्ली जल बोर्ड को क्या निर्देश दिया है?
NGT ने दिल्ली जल बोर्ड को वर्षा जल संचयन और भूजल गुणवत्ता निगरानी में कथित खामियों पर चार सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
2. मुख्य आरोप क्या हैं?
मुख्य आरोप ड्रेनेज के पास सिस्टम लगाना, पाइज़ोमीटर न लगाना और बोरवेल की गलत गहराई जैसे तकनीकी उल्लंघन के हैं।