तमिलनाडु का जल संसाधन विभाग (WRD) सितंबर के अंत तक वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं के लिए भूजल निकासी अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल करने जा रहा है। इस कदम का उद्देश्य निगरानी तंत्र को मजबूत करना और मंजूरी की अवधि को कम करना है।
- सितंबर के अंत तक भूजल NOC प्रक्रिया का डिजिटलीकरण पूरा होगा।
- नई ऑनलाइन प्रणाली से मंजूरी का समय 3-4 महीने से घटकर केवल 30-35 दिन रह जाएगा।
- तमिलनाडु के 386 ब्लॉक वर्तमान में 'अति-दोहन' (over-exploited) श्रेणी में हैं।
- नया कानून आने के बाद निजी टैंकरों और खनन कार्यों को भी इसके दायरे में लाया जाएगा।
तमिलनाडु सरकार ने जल प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए जल संसाधन विभाग (WRD) के माध्यम से भूजल निकासी के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने की प्रक्रिया को डिजिटल करने का निर्णय लिया है। यह पहल सितंबर के अंत तक पूरी होने की उम्मीद है, जिससे उद्योगों और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को अब मैन्युअल कागजी कार्रवाई के बजाय ऑनलाइन सेवाओं का लाभ मिलेगा।
वर्तमान में, जल-आधारित उद्योगों को बोरवेल खोदने के लिए मैन्युअल रूप से NOC प्रदान की जाती है। इस प्रक्रिया में काफी समय लगता है। तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी के सहयोग से विकसित यह नया पोर्टल e-Sevai केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध होगा। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता लाना और मंजूरी मिलने में लगने वाले समय को कम करना है।
प्रक्रिया में सुधार और समय की बचत
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि डिजिटलीकरण से न केवल भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होगी, बल्कि प्रशासनिक दक्षता में भी भारी वृद्धि होगी। वर्तमान में, नए आवेदनों को मंजूरी मिलने में 2 से 3 महीने लगते हैं, जबकि नवीनीकरण (renewal) में 4 महीने तक का समय लग सकता है। नई प्रणाली के लागू होने के बाद, यह अवधि घटकर मात्र 30-35 दिन रह जाएगी।
डिजिटलीकरण केवल सुविधा नहीं, बल्कि गिरते भूजल स्तर को नियंत्रित करने के लिए एक अनिवार्य निगरानी उपकरण है।
विभाग ने एक 'स्व-प्रमाणन' (self-certification) तंत्र भी पेश करने की योजना बनाई है। इसके तहत आवेदकों को फ्लोमीटर लगाने और वर्षा जल संचयन (rainwater harvesting) संरचनाओं के निर्माण जैसे नियमों का पालन करने की घोषणा करनी होगी।
जल संकट और कानूनी ढांचा
तमिलनाडु के लिए भूजल प्रबंधन एक गंभीर चुनौती है। 2025 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य के 1,202 ब्लॉकों में से 386 ब्लॉक 'अति-दोहन' की श्रेणी में हैं और 62 ब्लॉक 'क्रिटिकल' जोन में हैं। हालांकि, जागरूकता बढ़ने के कारण अति-दोहन वाले क्षेत्रों की संख्या में मामूली सुधार देखा गया है।
आने वाले समय में, तमिलनाडु जल संसाधन (विनियमन, प्रबंधन और संवर्धन) विधेयक, 2026 के लागू होने के बाद, इस नियम का दायरा और बढ़ेगा। एक बार राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद, निजी पानी के टैंकरों और खनन गतिविधियों को भी इस दायरे में लाया जाएगा, जिससे अवैध जल निकासी पर लगाम लगाई जा सकेगी।
Frequently Asked Questions
1. ऑनलाइन NOC प्रक्रिया का मुख्य लाभ क्या है?
इसका मुख्य लाभ समय की बचत है; मंजूरी की प्रक्रिया जो महीनों लेती थी, अब लगभग एक महीने में पूरी हो जाएगी।
2. क्या यह नियम निजी टैंकरों पर भी लागू होगा?
हाँ, नए विधेयक के पारित होने के बाद निजी पानी के टैंकरों को भी NOC के दायरे में लाया जाएगा।