नई शोध में बताया गया है कि कचरे और जानबूझकर भोजन देने से मिलने वाली ‘खाद्य सब्सिडी’ भारतीय शहरी क्षेत्रों में फ्री‑रेंज कुत्तों की जनसंख्या को बढ़ा रही है। केवल नसबंदी, हटाना या फेंसिंग जैसी उपायों से समस्या हल नहीं होगी, जब तक भोजन की उपलब्धता को नहीं बदला गया।

  • कचरा और जानबूझकर फ़ीडिंग कुत्तों की संख्या को बढ़ा रही है।
  • केवल नसबंदी‑वैक्‍सिनेशन से समस्या स्थायी नहीं होगी।
  • बहु‑प्रजाति सह-अस्तित्व के लिए समन्वित नीति आवश्यक है।

नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेज़ (NCBS) के डॉ. निशांत कुमार द्वारा किए गए अध्ययन ने दिखाया कि भारतीय शहरों में फ्री‑रेंज कुत्तों को लगातार उपलब्ध भोजन – कचरा और जानबूझकर फ़ीडिंग – उनके जनसंख्या विस्फोट का मुख्य कारण है। यह शोध Nature Cities में प्रकाशित हुआ है।

परम्परागत रूप से कुत्ते शहरी पारिस्थितिकी में मानव अपशिष्ट को स्कैवेंजर के रूप में साफ करने में मदद करते रहे हैं। लेकिन तेज़ शहरीकरण ने इस संबंध को बदल दिया है; बड़े पैमाने पर खाद्य अपशिष्ट, केंद्रित फ़ीडिंग साइट और जटिल शहरी बुनियादी ढांचा कुत्तों को समृद्ध वातावरण प्रदान करता है, जबकि उनके गतिशीलता को सीमित करता है।

कु मर ने कहा, “नसबंदी, वैक्सीन या हटाने जैसे उपाय तभी सफल होंगे जब हम भोजन सब्सिडी को भी संबोधित करें।” उनका तर्क है कि मौजूदा नीतियां केवल जनसंख्या नियंत्रण पर केंद्रित हैं, जबकि खाद्य आपूर्ति की स्थिरता को नजरअंदाज किया गया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that unchecked growth of street‑dog populations aggravates public‑health risks, wildlife predation, and competition with native scavengers, demanding a shift from reactive control to holistic coexistence strategies.

"शहरी कुत्तों की वृद्धि को रोकने के लिए हमें कचरा प्रबंधन और सार्वजनिक फ़ीडिंग को समानांतर रूप से सुधारना होगा," कहा पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अनीता सरदार ने।
Did You Know?: भारत में हर साल लगभग 30,000 कुत्ते के काटने की रिपोर्ट होती है, जिनमें से अधिकांश रैबीज़ का कारण बनते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या केवल नसबंदी से कुत्तों की आबादी घटेगी?
उत्तर: नहीं, क्योंकि भोजन की उपलब्धता को नहीं बदला गया तो जनसंख्या फिर भी बनी रहेगी।

प्रश्न 2: शहरों में कचरा प्रबंधन को कैसे सुधारा जा सकता है?
उत्तर: कचरे को अलग‑अलग संग्रहित कर, समय पर निपटान और सार्वजनिक फ़ीडिंग को नियमन करके।