पर्यावरणीय कार्यकर्ता और स्थानीय संगठनों ने टाटा चिप प्लांट के 5 किमी दायरे में स्थित पत्थर खदानों और क्रशरों से उत्पन्न धूल व बाढ़ की शिकायत की है। भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन के अनुसार, इस सूक्ष्म धूल से प्लांट के क्लीनरूम को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
- प्लांट के 5 किमी भीतर खदानों से धूल और अचानक बाढ़ पैदा हो रही है।
- सेमीकंडक्टर क्लीनरूम को अत्यंत शुद्ध पर्यावरण चाहिए, ISO क्लास 1‑5 मानकों के साथ।
- राज्य सरकार की 15 किमी प्रतिबंध नीति अस्पष्ट, कार्यकर्ता कड़ी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
परिचय
टाटा ग्रुप असम के मोरीगाँव जिले में जगीरोड में ₹27,000 करोड़ मूल्य का सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (TSAT) सुविधा बना रहा है। यह भारत की चिप‑निर्माण आत्मनिर्भरता योजना का मुख्य स्तम्भ है और भारत सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत राष्ट्रीय महत्व का प्रोजेक्ट माना जाता है।
पर्यावरणीय जोखिम
जगीरोड के आसपास पाँच किलोमीटर के भीतर स्थित पत्थर खदानें और क्रशर लगातार धूल (PM10, PM2.5) एवं गैसों का उत्सर्जन कर रहे हैं। स्थानीय संस्थाओं ने बताया कि सौनाइकुची रिज़र्व फॉरेस्ट में किए जा रहे खुदाई‑विस्फोट कार्यों से अचानक बाढ़ आती है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
नियमों में अंतराल
असम कैबिनेट ने मार्च 2024 में इलेक्ट्रॉनिक सिटी के 15 किमी दायरे में सीमेंट प्लांट व अन्य प्रदूषक उद्योगों को प्रतिबंधित करने का आदेश दिया था। लेकिन जुलाई 2026 में उद्योग विभाग ने स्पष्ट किया कि यह प्रतिबंध केवल भविष्य में लागू होगा, जबकि मौजूदा या पाइपलाइन परियोजनाओं को छूट दी गई है। यह अस्पष्टता कार्यकर्ताओं के लिए बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है।
कार्यकर्ता का आह्वान
गोलाघाट के पर्यावरण कार्यकर्ता रोहित चौधरी ने असम मुख्य सचिव को लिखित में अभ्यर्थना की, जिसमें उन्होंने 15 किमी के प्रतिबंध को 5 किमी तक घटाने की माँग की। उन्होंने कहा, “पत्थर खनन, क्वारी और क्रशिंग से उत्पन्न पार्टिकुलेट मैटर सेमीकंडक्टर निर्माण की कड़ी पर्यावरणीय आवश्यकताओं के साथ असंगत है।”
स्थानीय विरोध
बिर लछित सेना के स्थानीय इकाई ने 11 अगस्त को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को एक मेमोरेंडम भेजा, जिसमें अवैध पहाड़ी खुदाई व विस्फोट को रोकने की त्वरित कार्रवाई की मांग की गई। इसी तरह, मध्य असम कोच‑राजबोंगशी स्टूडेंट यूनियन ने 18 अगस्त को पर्यावरण एवं वन मंत्री को भी समान शिकायत दर्ज कराई।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that any contamination of the TSAT facility could delay India's ambitious goal to capture a larger share of the global chip market, potentially costing billions in lost investment and eroding confidence among foreign partners.
“If dust particles infiltrate a semiconductor fab, the yield can drop by up to 30%, turning a multi‑billion‑dollar project into a financial sinkhole.” – Dr. Ananya Singh, Materials Science Expert.
Frequently Asked Questions
- क्या मौजूदा खदानें कानूनी हैं? असम वन विभाग ने अप्रैल 2026 में सौनाइकुची रिज़र्व में कुछ खनन कार्यों को अवैध घोषित किया है, लेकिन कई ऑपरेटर अभी भी काम कर रहे हैं।
- टाटा प्लांट को कब शुरू होने की उम्मीद है? वर्तमान में 60% कार्य पूर्ण हो चुका है; लेकिन पर्यावरणीय बाधाओं के कारण शुरुआती संचालन 2027 तक टाल सकता है।