इशान पहाडे ने धावड़ में आयोजित फंडामेंटल मेमोरियल लेक्चर में बताया कि कीट और मकड़ी पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं। उनका कहना है कि इनका महत्व अक्सर अनदेखा किया जाता है, जबकि वे खाद्य सुरक्षा और जैव विविधता के लिए अनिवार्य हैं।
- कीट और मकड़ियों का पारिस्थितिक संतुलन में महत्व
- परागण और खाद्य सुरक्षा में उनकी भूमिका
- नागरिक विज्ञान के माध्यम से संरक्षण की आवश्यकता
पर्यावरण में कीटों की भूमिका
इंटोमोलॉजिस्ट इशान पहाडे, जो एंटोमन इंस्टीट्यूट ऑफ इनवर्टीब्रेट ज़ूलॉजी, पुणे के संस्थापक निदेशक हैं, ने कहा कि कीट और मकड़ी प्राकृतिक संतुलन के सबसे महत्वपूर्ण घटक हैं। ये छोटे जीव पौधों का परागण, पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण, और फसल क्षति से बचाव में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
कृषि उत्पादन पर प्रभाव
लगभग तीन-चौथाई फूलों वाले पौधे और कई प्रमुख कृषि फसलें मधुमक्खियों, तितलियों, पतंगों और भुनेरों जैसे कीटों पर निर्भर करती हैं। इनके बिना फलों, सब्जियों, तेलीय बीजों और अनाज की पैदावार में भारी गिरावट आएगी, जिससे जैव विविधता और मानव आजीविका दोनों प्रभावित होंगी।
मकड़ियों का पारिस्थितिक महत्व
स्पाइडर विशेषज्ञ अथर्वा कुलकर्णी ने बताया कि भारत में 4,000 से अधिक मकड़ी प्रजातियाँ हैं, परंतु केवल आधी ही वैज्ञानिक रूप से पहचान पाई गई हैं। आवास क्षय के कारण कई प्रजातियाँ दस्तावेज़ीकरण से पहले ही लुप्त हो सकती हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that diminishing insect and spider populations could trigger cascading effects on food chains, agricultural economies, and climate resilience, making immediate citizen‑science involvement crucial.
"कीट और मकड़ी के बिना हमारा पर्यावरण अस्थिर हो जाएगा, यही कारण है कि हमें उनके संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए," इशान पहाडे ने कहा।
नागरिक विज्ञान और संरक्षण पहल
पेशेवरों ने स्थानीय समुदायों को कीट और मकड़ी विविधता को फोटो, फील्ड नोट्स और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से दर्ज करने का आह्वान किया। ऐसी डेटा‑ड्रिवन पहलें शोध, संरक्षण योजना और जैव विविधता बोर्डों के लिए अनमोल साबित होंगी।
स्थानीय संरक्षण उद्यम
हलीगेरी में नेचर फर्स्ट इको विलेज ने विशेष संरक्षण उद्यान विकसित किए हैं, जैसे बट्राकैरियम (मेंढक आवास) और दुर्लभ तितली, पतंगा, मकड़ी एवं मधुमक्खी उद्यान, जो पर्यावरणीय शिक्षा को बढ़ावा देते हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कीटों की कमी से कृषि पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: परागण में कमी के कारण फसल उत्पादन घटेगा, जिससे खाद्य कीमतें बढ़ेंगी और किसानों की आय घटेगी।
प्रश्न 2: आम लोग कैसे योगदान दे सकते हैं?
उत्तर: स्थानीय जलवायु में कीटों और मकड़ियों की तस्वीरें ले कर, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर डेटा साझा कर, और स्कूल‑आधारित सर्वेक्षण में भाग लेकर।