काजीरंगा के पास स्थित सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन एंड कंजर्वेशन (CWRC) ने अपने संचालन के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस संस्थान ने अब तक 10,000 से अधिक घायल और अनाथ जानवरों का इलाज किया है, जिनमें से 68% को सफलतापूर्वक वापस जंगल में छोड़ दिया गया है।
- CWRC ने 25 वर्षों में 10,000 से अधिक जानवरों का सफल उपचार किया है।
- बचाए गए लगभग 68% जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस भेज दिया गया है।
- यह केंद्र असम वन विभाग, WTI और IFA के सहयोग से संचालित है।
- बाढ़ के दौरान जानवरों के बचाव में इस केंद्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
असम के काजीरंगा नेशनल पार्क के पास स्थित सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन एंड कंजर्वेशन (CWRC) ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में अपने गौरवशाली 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 28 अगस्त 2002 को स्थापित यह केंद्र भारत का पहला ऐसा समर्पित संस्थान है जो अनाथ और घायल वन्यजीवों को पालने, उनका उपचार करने और उन्हें पुन: जंगल में छोड़ने का कार्य करता है।
CWRC का संचालन असम वन विभाग और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) द्वारा इंटरनेशनल फंड फॉर एनिमल वेलफेयर (IFA) के साथ साझेदारी में किया जाता है। पांबारी में स्थित यह केंद्र न केवल एक उपचार केंद्र है, बल्कि विज्ञान-आधारित वन्यजीव संरक्षण का एक प्रमुख स्तंभ भी बन चुका है।
संरक्षण की एक ऐतिहासिक यात्रा
पिछले ढाई दशकों में, CWRC और उसकी मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयों ने 10,000 से अधिक रेस्क्यू किए गए जानवरों का इलाज किया है। आंकड़ों के अनुसार, लगभग 68% जानवरों को पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उनके प्राकृतिक वातावरण में सफलतापूर्वक वापस भेज दिया गया है। इसमें एक सींग वाले गैंडे, एशियाई काले भालू, जंगली भैंसे और हूलॉक गिब्बन जैसे महत्वपूर्ण जीव शामिल हैं।
CWRC ने न केवल अनगिनत जंगली जानवरों को बचाया है, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्रबंधित करने की हमारी क्षमता को भी मजबूत किया है।
काजीरंगा के फील्ड डायरेक्टर सी. रमेश ने बताया कि संकट में फंसे जानवरों के बचाव और पुनर्वास में CWRC का योगदान अमूल्य है। उन्होंने कहा कि इस केंद्र ने वन्यजीव प्रबंधन के प्रति हमारी समझ को गहरा किया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि CWRC की सफलता केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। विशेष रूप से असम जैसे क्षेत्रों में, जहाँ बाढ़ के कारण वन्यजीवों का विस्थापन एक वार्षिक समस्या है, CWRC की भूमिका जीवन रक्षक साबित होती है। यह केंद्र स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रक्रिया से जोड़कर मानव-पशु संघर्ष को कम करने में भी मदद करता है।
CWRC ने मानस नेशनल पार्क में एक सींग वाले गैंडों के पुनरुद्धार और दीहिंग पटकई नेशनल पार्क में एशियाई काले भालू के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. भास्कर चौधरी, केंद्र प्रबंधक, ने इस सफलता का श्रेय वन विभाग के साथ-साथ स्थानीय समुदायों और केंद्रीय ज़ू प्राधिकरण के निरंतर सहयोग को दिया है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: CWRC का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य घायल, अनाथ या संकट में पड़े वन्यजीवों का उपचार करना और उन्हें पुनः उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ना है।
प्रश्न 2: CWRC किन प्रमुख जानवरों का संरक्षण करता है?
उत्तर: यह गैंडे, भालू, जंगली भैंसे, हॉर्नबिल और हूलॉक गिब्बन जैसे विभिन्न प्रजातियों का संरक्षण करता है।