कुंभकोणम नगर निगम ने स्वच्छता कर्मियों को कचरे से हस्तशिल्प और उपयोगी वस्तुएं बनाने के लिए प्रशिक्षित किया है, जिससे शहर में अपशिष्ट प्रबंधन का एक नया अध्याय शुरू हुआ है।
- नगर निगम के 402 स्वच्छता कर्मी इस परियोजना में सक्रिय रूप से शामिल हैं।
- नारियल के छिलकों से इको-फ्रेंडली गमले और टेप से टोकरियां बनाई जा रही हैं।
- मंदिरों के फूलों और कपड़ों का उपयोग धूपबत्ती और पायदान बनाने में हो रहा है।
तमिलनाडु का ऐतिहासिक मंदिर शहर कुंभकोणम एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार धार्मिक कारणों से नहीं, बल्कि अपने क्रांतिकारी स्वच्छता मॉडल के कारण। कुंभकोणम नगर निगम ने 'वेस्ट टू वेल्थ' (कचरे से संपदा) परियोजना के माध्यम से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक मिसाल पेश की है। नगर निगम आयुक्त के. एम. सुधा के मार्गदर्शन में, स्वच्छता कर्मियों को अब केवल कचरा उठाने वाला नहीं, बल्कि कुशल कारीगर के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है।
कचरे के प्रबंधन में नया दृष्टिकोण
इस परियोजना की सफलता का मुख्य आधार 'स्रोत पर पृथक्करण' (segregation at source) है। स्वच्छता निरीक्षक के. मणिमारन ने बताया कि पहले कचरा मिश्रित रूप में आता था, जिसे सीधे डंपिंग साइट पर फेंकना पड़ता था। लेकिन अब, सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) अभियान के माध्यम से नागरिकों को कचरा अलग करने के लिए प्रेरित किया गया है। इससे निगम को पुनर्चक्रण (recycling) के लिए उपयोगी सामग्री प्राप्त हो रही है।
अपशिष्ट से मूल्यवान उत्पाद: एक विश्लेषण
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह मॉडल न केवल पर्यावरण के लिए अच्छा है, बल्कि यह स्वच्छता कर्मियों के लिए आय के नए स्रोत भी खोल रहा है। यहाँ कुछ प्रमुख परिवर्तन दिए गए हैं:
- नारियल और ताड़ के छिलके: इनसे अत्यधिक टिकाऊ और इको-फ्रेंडली प्लांटर पॉट्स (गमले) बनाए जा रहे हैं।
- प्लास्टिक पैकिंग टेप: जिसे पहले कचरा माना जाता था, अब उससे सुंदर टोकरियां बुनी जा रही हैं।
- मंदिर का कचरा: प्रतिदिन 300-500 किलो फूल और चढ़ावा मिलता है, जिसे सुखाकर और कपूर के साथ मिलाकर सुगंधित धूपबत्ती बनाई जा रही है।
कचरे का पुनर्चक्रण केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक सशक्तिकरण का एक शक्तिशाली उपकरण है।
इतना ही नहीं, शहर के मंदिरों में भक्तों द्वारा छोड़े गए कपड़ों को कीटाणुरहित कर और सुखाकर उन्हें पायदान (doormats) में बदला जा रहा है। लकड़ी के बुरादे और प्लास्टिक कचरे को औद्योगिक इकाइयों के लिए ईंधन के विकल्प के रूप में भी उपयोग किया जा रहा है।
Why This Matters
यह पहल शहरी निकायों के लिए एक ब्लूप्रिंट है। यह साबित करती है कि यदि सही प्रशिक्षण और इच्छाशक्ति हो, तो नगरपालिकाएं अपने परिचालन खर्च को कम कर सकती हैं और कचरे को एक राजस्व स्रोत में बदल सकती हैं।
Frequently Asked Questions
1. इस परियोजना में कितने कर्मचारी शामिल हैं?
वर्तमान में कुल 402 स्वच्छता कर्मी इस परियोजना के विभिन्न चरणों में शामिल हैं।
2. इन उत्पादों को कहाँ बेचा जाएगा?
नगर निगम जल्द ही इन उत्पादों की बिक्री के लिए वेंडिंग स्टॉल लगाने की योजना बना रहा है, जिससे होने वाली आय कर्मियों के कल्याण में उपयोग की जाएगी।