कर्नाटक के कोडगु और चिकमगलूर जिलों में सोशल मीडिया द्वारा प्रचारित 'हिडन स्पॉट्स' पर पर्यटकों की भीड़ बढ़ रही है, जिससे संवेदनशील जंगलों और जल स्रोतों को अपूरणीय क्षति होने का डर है।
- सोशल मीडिया और निजी टूर ऑपरेटरों द्वारा बिना अनुमति के 'हिडन स्पॉट' ट्रेकिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- नीलकुरिंजी (Neelakurinji) जैसे दुर्लभ पौधों और वन्यजीव आवासों को गंभीर खतरा है।
- पर्यटकों द्वारा फैलाया गया प्लास्टिक कचरा स्थानीय पेयजल स्रोतों को प्रदूषित कर रहा है।
कर्नाटक के पश्चिमी घाटों, विशेष रूप से कोडगु और चिकमगलूर जिलों में पर्यावरणविदों और स्थानीय निवासियों ने एक खतरनाक प्रवृत्ति के खिलाफ आवाज उठाई है। निजी यात्रा एजेंट और बेंगलुरु व मैसूर के टूर ऑपरेटर सोशल मीडिया का उपयोग करके उन दूरदराज के प्राकृतिक स्थलों को 'हिडन जेम्स' के रूप में प्रचारित कर रहे हैं, जो पारिस्थितिक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, वन विभाग की अनुमति के बिना इन क्षेत्रों में व्यावसायिक ट्रेकिंग आयोजित की जा रही है। इससे न केवल जंगलों की शांति भंग हो रही है, बल्कि पर्यटकों द्वारा छोड़े गए प्लास्टिक कचरे ने जल स्रोतों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को प्रदूषित कर दिया है। कोडगु के नेलजी और पेरुर जैसे क्षेत्रों में स्थिति अधिक चिंताजनक है, जहां दुर्लभ नीलकुरिंजी फूलों के खिलने के दौरान पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि 'इंस्टाग्राम रील संस्कृति' और 'ऑफ-बीट' पर्यटन की चाहत ने प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी को खत्म कर दिया है। जब बिना किसी नियमन के हजारों लोग संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश करते हैं, तो यह केवल कचरे की समस्या नहीं रह जाती, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) की संभावना को भी बढ़ा देता है।
वन क्षेत्र निजी व्यावसायिक आय के लिए खेल के मैदान नहीं हैं; इनका अनियंत्रित उपयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक आपदा का कारण बनेगा।
चिकमगलूर में भी इसी तरह की समस्या देखी गई है, जहां कलसा और कोप्पा क्षेत्रों में निजी समूहों द्वारा अवैध ऑफ-रोडिंग गतिविधियां संचालित की गईं। पर्यावरण कार्यकर्ता नागराज कूवे ने चेतावनी दी है कि इन गतिविधियों का मलनाड पारिस्थितिकी तंत्र पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हाल ही में मुडिगेरे तालुक के रानी झारी व्यूप्वाइंट पर कुछ पर्यटकों द्वारा एक गहरी खाई के किनारे वाहन चलाने की घटना ने सुरक्षा और पर्यावरण दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय निवासी बिद्दप्पा ने बताया कि मारन्दोडा गांव का बालियात्रे झरना, जो ग्रामीणों के लिए पीने के पानी का मुख्य स्रोत है, अब रील बनाने वालों का अड्डा बन गया है, जिससे पानी के दूषित होने का खतरा बढ़ गया है।
| प्रभावित क्षेत्र | मुख्य समस्या | जोखिम |
|---|---|---|
| कोडगु (नेलजी/पेरुर) | अवैध ट्रेकिंग | नीलकुरिंजी पौधों का विनाश |
| चिकमगलूर (कोप्पा) | ऑफ-रोडिंग गतिविधियां | मिट्टी का कटाव और शोर प्रदूषण |
| मारन्दोडा (बालियात्रे) | अनियंत्रित पर्यटन | पेयजल स्रोतों का प्रदूषण |
Frequently Asked Questions
1. क्या पश्चिमी घाटों में ट्रेकिंग पूरी तरह प्रतिबंधित है?
नहीं, लेकिन वन विभाग की अनुमति के बिना व्यावसायिक ट्रेकिंग और प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश अवैध है।
2. 'हिडन स्पॉट' पर्यटन पर्यावरण के लिए हानिकारक क्यों है?
क्योंकि ये क्षेत्र बुनियादी ढांचे (जैसे कचरा प्रबंधन) से रहित होते हैं और यहां मानवीय हस्तक्षेप से दुर्लभ प्रजातियां नष्ट हो सकती हैं।