परियार नदी में 1 सितंबर को अचानक सफ़ेद झाग की परत दिखने के बाद केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने फ़र्टिलाइज़र एंड केमिकल्स ट्रवंकोर लिमिटेड (FACT) को औपचारिक नोटिस जारी किया। बोर्ड का कहना है कि यह कार्रवाई पिछले संभावित गैर‑कानूनी डिस्चार्ज और बढ़े हुए तेल‑ग्रिस स्तरों की जाँच के आधार पर ली गई है।

  • 1 सितंबर को परियार में सफ़ेद फेन देखा गया।
  • केरल PCB ने FACT को जल प्रदूषण अधिनियम के तहत नोटिस भेजा।
  • पानी के नमूनों में तेल‑ग्रिस स्तर 2 mg/l बढ़ा, स्रोत अभी जांच में है।

केरल के एड़यार औद्योगिक क्षेत्र के पास स्थित परियार नदी में 1 सितंबर को जल का रंग सफ़ेद हो गया और सतह पर झाग की परत बन गई। यह घटना स्थानीय निवासियों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का ध्यान आकर्षित कर गई।

केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) ने अपने पर्यावरण सर्विलांस सेंटर, एलोर, के माध्यम से फ़र्टिलाइज़र एंड केमिकल्स ट्रवंकोर लिमिटेड (FACT) को जल (प्रिवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ़ पोल्यूशन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत औपचारिक नोटिस जारी किया। नोटिस में FACT को बताया गया कि यदि वह उल्लंघन को रोकने के लिए त्वरित कदम नहीं उठाता तो कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

PCB ने चार प्रभावित बिंदुओं से जल नमूने एकत्र किए। इन नमूनों में तेल और ग्रिस की मात्रा 4.8 mg/l से 6.5 mg/l तक पाई गई, जो चार महीने पहले परीक्षण किए गए नमूनों से लगभग 2 mg/l अधिक है। अधिकारियों ने कहा कि स्रोत की पुष्टि हेतु और अधिक परीक्षण आवश्यक हैं।

FACT के प्रवक्ता ने कहा कि बोर्ड ने उन्हें मार्च‑अप्रैल के गर्मी के दौरान भी सफ़ेद फेन की रिपोर्ट दी थी। उन्होंने बताया कि नदी के पास स्थित पुरानी लिचेट जमा, जो केवल उनके यूनिट तक सीमित नहीं है, इस फेन का कारण हो सकती है और उन्होंने बोर्ड द्वारा निर्देशित सुधारात्मक कदम उठाए हैं। उन्होंने इस बात को खारिज किया कि मंगलवार का फेन उनके यूनिट के डिस्चार्ज का परिणाम है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि : परियार नदी को पिछले दशकों में कई औद्योगिक प्रदूषण घटनाओं का सामना करना पड़ा है। विशेषकर केमिकल और उर्वरक उद्योगों ने जल गुणवत्ता में गिरावट, मछली मरना और स्थानीय कृषि पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। इस कारण राज्य ने कई बार जल संरक्षण के लिए कड़े नियम लागू किए हैं, परंतु निगरानी की कमी अक्सर उल्लंघनों को अनदेखा करती रही है।

स्थानीय समुदायों के लिए यह घटना गंभीर चिंता का कारण है, क्योंकि परियार नदी कई गांवों के लिए पीने का जल, सिंचाई और मत्स्य पालन का मुख्य स्रोत है। यदि फेन का कारण औद्योगिक डिस्चार्ज सिद्ध होता है तो यह न केवल पर्यावरणीय क्षति बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम भी उत्पन्न कर सकता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that repeated violations in the Periyar basin could trigger stricter federal oversight and compel factories to adopt advanced effluent‑treatment technologies, setting a precedent for other polluted waterways across India.

“यदि जल में तेल‑ग्रिस की बढ़ती मात्रा को समय पर नियंत्रित नहीं किया गया, तो यह न केवल जैव विविधता को नुकसान पहुँचेगा बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी ध्वस्त कर सकता है,” कहा पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अंजलि राव ने।
Did You Know?: परियार नदी का बेसिन लगभग 7,500 वर्ग किलोमीटर में फैला है और यह केरल के प्रमुख जल संसाधनों में से एक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या FACT ने अब तक कोई औपचारिक जवाब दिया है?

उत्तर: FACT ने बोर्ड को अपना स्पष्टीकरण भेजा है और कहा है कि वे बोर्ड द्वारा निर्देशित सुधारात्मक कार्यवाही कर रहे हैं।

प्रश्न 2: इस फेन की वजह से स्थानीय लोगों को क्या जोखिम है?

उत्तर: यदि फेन औद्योगिक रसायनों से उत्पन्न है तो जल सेवन, कृषि और मत्स्य पालन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।