मलप्पुरम के वेन्जली वेटलैंड्स में दुर्लभ फुलवस व्हिसलिंग डक के एक झुंड को देखा गया है, जो आमतौर पर पूर्वोत्तर भारत में पाए जाते हैं। यह खोज क्षेत्र में जैव विविधता के महत्व को रेखांकित करती है।

  • मलप्पुरम के तिरुंगडी के पास वेन्जली वेटलैंड्स में 30 से अधिक फुलवस व्हिसलिंग डक देखे गए।
  • यह प्रजाति आमतौर पर असम और पूर्वोत्तर राज्यों के आर्द्रभूमि क्षेत्रों में पाई जाती है।
  • दुर्लभ पक्षी की पहचान गर्दन पर काली रेखा और गले पर सफेद धब्बे से की जा सकती है।

केरल के मलप्पुरम जिले में प्रकृति प्रेमियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। तिरुंगडी के पास चेरुमुक्कू स्थित वेन्जली वेटलैंड्स में 30 से अधिक फुलवस व्हिसलिंग डक (Dendrocygna bicolor) का एक झुंड देखा गया है। पक्षी प्रेमियों के लिए यह एक ऐतिहासिक क्षण है क्योंकि मलप्पुरम में इस प्रजाति का यह पहला आधिकारिक रिकॉर्ड है।

ये पक्षी मुख्य रूप से असम और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों की आर्द्रभूमि में निवास करते हैं। वे मानसून की शुरुआत में केरल पहुंचते हैं और आमतौर पर अक्टूबर तक वापस लौट जाते हैं। इस दुर्लभ दृश्य को पीएसएमओ कॉलेज के शिक्षक कबीराली पी. और मलप्पुरम बर्डर्स की सदस्य फातिमा सबीहा पी.पी. ने दर्ज किया।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह की दुर्लभ प्रजातियों की उपस्थिति स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण संकेतक है। वेन्जली जैसे वेटलैंड्स न केवल प्रवासी पक्षियों के लिए भोजन और आश्रय प्रदान करते हैं, बल्कि वे क्षेत्रीय जैव विविधता को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दुर्लभ प्रजातियों का आगमन यह दर्शाता है कि हमारे स्थानीय जल निकाय अभी भी प्रवासी पक्षियों के लिए एक सुरक्षित और समृद्ध आवास बने हुए हैं।

फुलवस व्हिसलिंग डक की पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है क्योंकि यह सामान्य 'लेसर व्हिसलिंग डक' जैसा दिखता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने बताया कि गर्दन के पीछे एक काली रेखा, गले पर सफेद धब्बा और शरीर का बड़ा आकार इसे अलग पहचान देता है। इनके पैर नीले-धूसर रंग के और चोंच धूसर रंग की होती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

चेरुमुक्कू वेटलैंड्स पिछले चार वर्षों से व्यवस्थित जलपक्षी सर्वेक्षणों का केंद्र रहा है। भूमीथ्रा सेना क्लब और विभिन्न स्थानीय संगठनों के सहयोग से किए गए सर्वेक्षणों में अब तक 70 से 80 विभिन्न पक्षी प्रजातियों को रिकॉर्ड किया जा चुका है, जिनमें ग्रे-हेडेड लैपविंग और पेंटेड स्टॉर्क जैसे दुर्लभ पक्षी भी शामिल हैं।

Did You Know?: फुलवस व्हिसलिंग डक अपनी उच्च-पिच वाली सीटी जैसी आवाज के लिए जानी जाती है, जिससे इन्हें इनका नाम मिला है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: फुलवस व्हिसलिंग डक मुख्य रूप से कहाँ पाई जाती है?
उत्तर: यह पक्षी मुख्य रूप से असम और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की आर्द्रभूमि में पाई जाती है।

प्रश्न 2: इन्हें केरल में कब देखा जा सकता है?
उत्तर: ये मानसून की शुरुआत में केरल आते हैं और आमतौर पर अक्टूबर तक वापस चले जाते हैं।