एक नए अध्ययन के अनुसार, पिचावरम मैंग्रोव वन का कुल आर्थिक मूल्य ₹2,485.38 करोड़ है, जो इसके जलवायु विनियमन और तटीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है।

  • पिचावरम मैंग्रोव का कुल आर्थिक मूल्य ₹2,485.38 करोड़ (लगभग $289 मिलियन) आंका गया है।
  • प्रति हेक्टेयर मूल्य ₹1.83 करोड़ है, जो इसकी पारिस्थितिक महत्ता को दर्शाता है।
  • मिट्टी में संचित कार्बन (Soil Organic Carbon) का मूल्य सबसे अधिक ₹1,224.63 करोड़ है।
  • मैंग्रोव वन जलवायु परिवर्तन से लड़ने और तटीय सुरक्षा के लिए एक प्राकृतिक ढाल हैं।

हाल ही में किए गए एक व्यापक अध्ययन ने भारत के सबसे महत्वपूर्ण तटीय पारिस्थितिकी तंत्रों में से एक, पिचावरम मैंग्रोव वन के आर्थिक महत्व को उजागर किया है। अध्ययन के अनुसार, इस पारिस्थितिकी तंत्र का कुल आर्थिक मूल्य (TEV) ₹2,485.38 करोड़ है। यह आंकड़ा न केवल इसकी जैव विविधता को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि ये वन मानव कल्याण और पर्यावरणीय स्थिरता के लिए कितने अपरिहार्य हैं।

अध्ययन में पाया गया कि मैंग्रोव केवल मछली पकड़ने या पर्यटन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ऑक्सीजन विनियमन, कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration) और तटीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। विशेष रूप से, ब्लू कार्बन (Blue Carbon) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। मैंग्रोव वनस्पतियों और मिट्टी को मिलाकर, पिचावरम के ब्लू कार्बन संपत्ति का कुल मूल्य ₹1,612.40 करोड़ आंका गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि विकास परियोजनाओं में अक्सर इन 'गैर-बाजार' पारिस्थितिक लाभों को अनदेखा कर दिया जाता है। यदि हम मैंग्रोव के आर्थिक मूल्य को नहीं समझते हैं, तो हम अनजाने में अपनी सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक सुरक्षा प्रणालियों को नष्ट कर रहे हैं। यह अध्ययन नीति निर्माताओं को तटीय विकास की योजना बनाते समय प्रकृति को आर्थिक रूप से जोड़ने का आधार प्रदान करता है।

मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र पारिस्थितिक स्थिरता और मानव कल्याण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं, फिर भी कई सेवाएं पारंपरिक विकास योजना में कम आंकी जाती हैं।

पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का आर्थिक विभाजन

सेवा का प्रकारआर्थिक मूल्य (₹ करोड़ में)
तटीय सुरक्षा कार्य147.17
ऑक्सीजन विनियमन181.22
मनोरंजन और पर्यटन484.25
कार्बन स्टॉक (वनस्पति)387.77
मृदा कार्बन (Soil Carbon)1,224.63

यह अध्ययन बेंगलुरु स्थित इंस्टीट्यूट फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक चेंज (ISEC) के एसोसिएट प्रोफेसर एम. बालासुब्रमण्यम द्वारा किया गया था। शोध के लिए पांच मैंग्रोव-निर्भर गांवों के 302 परिवारों से प्राथमिक डेटा एकत्र किया गया था। अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि समुद्र के बढ़ते स्तर से पिचावरम और मुथुपेट जैसे मैंग्रोव क्षेत्रों पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

ऐतिहासिक रूप से, मैंग्रोव को केवल दलदली भूमि माना जाता था, लेकिन अब वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है कि ये 'कार्बन सिंक' के रूप में कार्य करते हैं। IUCN की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 50% मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्रों के नष्ट होने का खतरा है, जो वैश्विक जलवायु सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है।

Did You Know?: मैंग्रोव की मिट्टी में कार्बन का भंडार वनस्पतियों की तुलना में कहीं अधिक होता है, जो इन्हें दुनिया के सबसे शक्तिशाली कार्बन सिंक में से एक बनाता है।

Frequently Asked Questions

1. पिचावरम मैंग्रोव का प्रति हेक्टेयर मूल्य क्या है?
अध्ययन के अनुसार, पिचावरम मैंग्रोव का प्रति हेक्टेयर मूल्य ₹1.83 करोड़ है।

2. ब्लू कार्बन क्या है?
ब्लू कार्बन वह कार्बन है जो तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र, जैसे मैंग्रोव, द्वारा अवशोषित और संग्रहीत किया जाता है।