संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि समुद्र के बढ़ते स्तर के कारण मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे महानगरों पर स्थायी रूप से डूबने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे करोड़ों लोग बेघर हो सकते हैं।
- संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण एशिया के 1.4 करोड़ से अधिक लोग घर खोने के कगार पर हैं।
- मुंबई में भूमि धंसने और खारे पानी के प्रवेश से पेयजल संकट गहरा सकता है।
- 2100 तक समुद्र का स्तर 0.5 से 2 मीटर तक बढ़ने का अनुमान है।
- मुंबई के 80% हिस्से के 2050 तक जलमग्न होने की संभावना है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया रिपोर्ट ने एक भयावह तस्वीर पेश की है। वैश्विक समुद्र स्तर में रिकॉर्ड वृद्धि के कारण मुंबई, कोलकाता और ढाका जैसे प्रमुख दक्षिण एशियाई महानगरों को स्थायी रूप से जलमग्न होने का गंभीर खतरा है। अगस्त में संयुक्त राष्ट्र महासभा को सौंपी गई रिपोर्ट 'चुनौतियां: समुद्र स्तर में वृद्धि और समाधान' के अनुसार, इस क्षेत्र में 1.4 करोड़ से अधिक लोग अपने घरों को खोने के तत्काल जोखिम में हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि 2024 में वैश्विक समुद्र स्तर 5.9 मिमी की दर से बढ़ा है, जो पिछले दशक के औसत (4.7 मिमी) से काफी अधिक है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि उत्सर्जन में भारी कमी नहीं की गई, तो 2100 तक समुद्र का स्तर कम से कम 0.5 मीटर बढ़ जाएगा। सबसे खराब स्थिति में, अंटार्कटिक बर्फ की चादर पिघलने से यह वृद्धि 2 मीटर तक पहुंच सकती है, जिससे तटीय क्षेत्रों में समुद्र का स्तर बढ़ना एक वार्षिक घटना बन जाएगी।
मुंबई के लिए विशिष्ट खतरे
मुंबई के लिए स्थिति और भी जटिल है। यहाँ केवल समुद्र का स्तर बढ़ना ही समस्या नहीं है, बल्कि भूमि धंसना (Land Subsidence) और खारे पानी का प्रवेश (Saltwater Intrusion) भी बड़ी चुनौतियां हैं। खारा पानी मीठे पानी के स्रोतों और तटीय कुओं को दूषित कर सकता है, जिससे शहर में पीने के पानी का संकट पैदा हो सकता है। इसके अलावा, समुद्री तूफानों (Storm Surges) से स्वच्छता, आवास और परिवहन बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक दबाव पड़ेगा।
मुंबई तीन तरफ से अरब सागर से घिरा है, और समुद्र के बढ़ते तापमान के कारण अत्यधिक वर्षा और गर्मी की घटनाएं और भी तीव्र हो रही हैं।
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, मुंबई का भौगोलिक स्वरूप इसे जलवायु परिवर्तन के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाता है। जलवायु वैज्ञानिक रघु मुर्तुगुड्डे के अनुसार, अरब सागर के गर्म होने से समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव आया है, जिससे अत्यधिक भारी वर्षा की घटनाएं बढ़ रही हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ और भविष्य की चेतावनी
यह संकट नया नहीं है। 2021 में बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) द्वारा जारी 'मुंबई जलवायु कार्य योजना' (MCAP) ने भी चेतावनी दी थी कि 2050 तक मुंबई का 80% हिस्सा जलमग्न हो सकता है। पिछले छह वर्षों में, मुंबई में अत्यधिक भारी वर्षा की घटनाओं में औसत वृद्धि 132 मिमी से बढ़कर 182 मिमी हो गई है, जो इस बात का प्रमाण है कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब केवल भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की वास्तविकता है।
Frequently Asked Questions
1. क्या मुंबई वास्तव में डूब जाएगा?
रिपोर्ट के अनुसार, यदि समुद्र का स्तर बढ़ता रहा, तो मुंबई के कई निचले इलाकों के स्थायी रूप से जलमग्न होने का उच्च जोखिम है।
2. समुद्र के स्तर में वृद्धि का मुख्य कारण क्या है?
ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियरों का पिघलना और समुद्र के पानी का तापीय विस्तार (Thermal Expansion) मुख्य कारण हैं।