संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की एक नई रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि वैश्विक तापमान का 1.5°C के लक्ष्य को पार करना अब टाला नहीं जा सकता। विशेषज्ञों का मानना है कि सबसे अच्छे परिदृश्य में भी तापमान 1.8°C तक पहुंच सकता है।
- वैश्विक तापमान का 1.5°C के लक्ष्य को पार करना अब अपरिहार्य हो गया है।
- सबसे अच्छे परिदृश्य (Optimistic Scenario) में भी तापमान 1.8°C तक पहुंचने की संभावना है।
- तापमान को वापस नीचे लाने के लिए कार्बन डाइऑक्साइड हटाने की तकनीक पर निर्भरता बढ़ेगी।
- 1.5°C की सीमा पार करने से अमेज़न वर्षावन और ग्लेशियरों जैसे पारिस्थितिक तंत्रों को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की हालिया रिपोर्ट 'Limiting Overshoot' ने दुनिया को एक गंभीर चेतावनी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक औसत तापमान का पूर्व-औद्योगिक स्तरों से 1.5°C ऊपर जाना अब एक वास्तविकता बन चुका है। यह वह सीमा है जिसे 2015 के पेरिस समझौते के तहत सुरक्षित माना गया था।
क्या है 'ओवरशूट' का संकट?
जब वैज्ञानिक 'ओवरशूट' की बात करते हैं, तो उनका तात्पर्य उस स्थिति से है जहां वैश्विक तापमान अल्पकाल के लिए 1.5°C की निर्धारित सीमा को पार कर जाता है। UNEP का कहना है कि भले ही सभी देश अपने वर्तमान जलवायु लक्ष्यों को पूरी तरह से लागू कर दें, फिर भी तापमान 1.8°C के आसपास चरम पर पहुंच सकता है। यह स्थिति जलवायु नीति के लिए एक बड़ा मोड़ है।
क्यों यह चिंता का विषय है?
1.5°C की सीमा केवल एक संख्या नहीं है; यह मानवता और प्रकृति के बीच के संतुलन की रेखा है। जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, चरम गर्मी, सूखा और जल संकट का खतरा बढ़ता जाता है। BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि तापमान में प्रत्येक अतिरिक्त अंश (fraction of a degree) पारिस्थितिक तंत्र के लिए विनाशकारी साबित हो सकता है।
1.5°C को अब एक ऐसे लक्ष्य के रूप में देखा जाना चाहिए जिसे हम नीचे से ऊपर की ओर नहीं, बल्कि ऊपर से नीचे की ओर प्राप्त करेंगे।
अपरिवर्तनीय क्षति का जोखिम
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि तापमान के बढ़ने से कुछ नुकसान ऐसे होंगे जिन्हें कभी ठीक नहीं किया जा सकेगा। इसमें ग्रीनलैंड और पश्चिम अंटार्कटिक बर्फ की चादरों का पिघलना, अमेज़न वर्षावन का विनाश और महासागरीय धाराओं (जैसे Atlantic Meridional Overturning Circulation) का बाधित होना शामिल है।
भविष्य की रणनीति: बदलाव की आवश्यकता
UNEP का सुझाव है कि अब देशों को अपनी रणनीति बदलनी होगी। लक्ष्य अब केवल उत्सर्जन कम करना नहीं, बल्कि तापमान को जितना संभव हो सके कम समय के लिए उच्च स्तर पर रखना और फिर उसे वापस नीचे लाना होना चाहिए। इसके लिए कार्बन डाइऑक्साइड हटाने की तकनीकों (Carbon Dioxide Removal) में भारी निवेश की आवश्यकता होगी।
Frequently Asked Questions
1. क्या 1.5°C पार करने का मतलब है कि पेरिस समझौता विफल हो गया है?
नहीं, पेरिस समझौता दीर्घकालिक औसत तापमान पर आधारित है। अल्पकालिक ओवरशूट का मतलब समझौते का पूर्ण उल्लंघन नहीं है, लेकिन यह एक गंभीर चेतावनी है।
2. क्या हम तापमान को वापस नीचे ला सकते हैं?
हाँ, लेकिन इसके लिए उत्सर्जन में भारी कटौती के साथ-साथ उन्नत कार्बन कैप्चर तकनीकों की आवश्यकता होगी, जो वर्तमान में काफी महंगी और चुनौतीपूर्ण हैं।