विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि जंगलों की आग और बढ़ता तापमान हवा की गुणवत्ता को नष्ट कर रहे हैं। सूक्ष्म प्रदूषक और जहरीला धुआं वैश्विक स्वास्थ्य संकट पैदा कर रहे हैं, जो जलवायु परिवर्तन के प्रयासों को विफल कर सकते हैं।
- जंगलों की आग से निकलने वाला PM2.5 धुआं औद्योगिक प्रदूषण से अधिक जहरीला है।
- 1990 के दशक से चरम अग्नि-धुएं की घटनाएं तीन गुना बढ़ गई हैं।
- ग्राउंड-लेवल ओजोन और माइक्रोप्लास्टिक्स वायुमंडल के लिए नए और गंभीर खतरे बन गए हैं।
जेनेवा, स्विट्जरलैंड: संयुक्त राष्ट्र की मौसम और जलवायु एजेंसी, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने सोमवार को एक गंभीर चेतावनी जारी की है। संगठन के अनुसार, भीषण जंगलों की आग (Wildfires) और हीटवेव से उत्पन्न होने वाले सूक्ष्म वायु प्रदूषक न केवल मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा हैं, बल्कि वे हवा की गुणवत्ता सुधारने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को भी पटरी से उतार रहे हैं।
WMO ने अपने नवीनतम वार्षिक 'वायु गुणवत्ता और जलवायु बुलेटिन' में स्पष्ट किया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हीटवेव और जंगलों की आग की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका में औद्योगिक और परिवहन उत्सर्जन (PM2.5) में कमी आई है, लेकिन आग से संबंधित PM2.5 के संपर्क में आने वाले लोगों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है।
PM2.5 और जहरीले धुएं का प्रभाव
PM2.5 उन सूक्ष्म कणों को कहा जाता है जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है। ये इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों के गहराई तक प्रवेश कर सीधे रक्तप्रवाह (bloodstream) में मिल सकते हैं। WMO ने चेतावनी दी है कि जलते हुए वनस्पतियों से निकलने वाले माइक्रोपार्टिकल्स कार के धुएं या औद्योगिक उत्सर्जन की तुलना में कहीं अधिक जहरीले होते हैं।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पारंपरिक जोखिम मॉडल अक्सर जंगल की आग से होने वाली मौतों का कम आकलन करते हैं। WMO के अनुसार, वर्तमान मॉडल अग्नि-जनित मृत्यु दर को 93% तक कम आंक सकते हैं, जिसका अर्थ है कि संकट हमारी कल्पना से कहीं अधिक गहरा है। यह केवल एक पर्यावरणीय समस्या नहीं, बल्कि एक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है।
"वायु गुणवत्ता और जलवायु परिवर्तन को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता; यदि एक बिगड़ता है, तो दूसरा भी अनिवार्य रूप से बिगड़ता है।" - लोरेंजो लाब्राडोर, WMO ग्लोबल एटमॉस्फेयर वॉच।
ओजोन और माइक्रोप्लास्टिक्स का बढ़ता खतरा
रिपोर्ट में केवल धुएं का ही नहीं, बल्कि ग्राउंड-लेवल ओजोन का भी उल्लेख किया गया है। जब तापमान बढ़ता है और सौर विकिरण तीव्र होता है, तो ओजोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे श्वसन संबंधी बीमारियां और समय से पहले मौतें होती हैं। इसके अतिरिक्त, वायुमंडल में माइक्रोप्लास्टिक्स का प्रसार एक नई चिंता है। सिमुलेशन के अनुसार, भूमि पर 51 मिलियन टन और महासागरों में 22 मिलियन टन माइक्रोप्लास्टिक्स मौजूद हैं, जो हवा के जरिए दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुँच रहे हैं।
एक और चिंताजनक पहलू 'ब्लैक कार्बन' (कालिख) का है। जब यह बर्फ और ग्लेशियरों पर जमा होता है, तो सूर्य की रोशनी के परावर्तन को कम कर देता है, जिससे बर्फ तेजी से पिघलती है और वैश्विक तापमान में और वृद्धि होती है।
| प्रदूषक | मुख्य स्रोत | मुख्य प्रभाव |
|---|---|---|
| PM2.5 (Wildfire) | जंगल की आग | फेफड़ों और रक्तप्रवाह में प्रवेश, उच्च विषाक्तता |
| ग्राउंड-लेवल ओजोन | हीटवेव + सौर विकिरण | गंभीर श्वसन रोग और समय से पहले मृत्यु |
| ब्लैक कार्बन | अपूर्ण दहन / धुआं | ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना |
प्रश्न 1: PM2.5 क्या है और यह खतरनाक क्यों है?
उत्तर: PM2.5 2.5 माइक्रोमीटर से छोटे कण होते हैं जो सांस के जरिए फेफड़ों के गहरे हिस्सों और रक्त में प्रवेश कर सकते हैं, जिससे हृदय और श्वसन संबंधी गंभीर बीमारियां होती हैं।
प्रश्न 2: माइक्रोप्लास्टिक्स हवा में कैसे पहुँचते हैं?
उत्तर: जब प्लास्टिक कचरा धूप या अन्य कारकों के कारण टूटता है, तो वह सूक्ष्म कणों में बदल जाता है, जो हवा के जरिए दुनिया के सबसे दूरस्थ हिस्सों तक फैल जाते हैं।