पर्यावरण और जलीय जीवन की रक्षा के लिए कर्नाटक सरकार ने राज्यव्यापी अभियान चलाकर हजारों अवैध प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की मूर्तियों को जब्त किया है।

  • कर्नाटक भर में 2,564 प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की गणेश मूर्तियां जब्त।
  • विशेष प्रवर्तन टीमों द्वारा 357 दुकानों और गोदामों की जांच की गई।
  • वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री रामलिंगा रेड्डी के नेतृत्व में अभियान।
  • गैर-बायोडिग्रेडेबल मूर्तियों के निर्माण, बिक्री और विसर्जन पर सख्त प्रतिबंध।

कर्नाटक सरकार ने प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) से बनी गणेश मूर्तियों के उपयोग को रोकने के लिए राज्य स्तर पर एक व्यापक अभियान शुरू किया है। जल निकायों की सुरक्षा के लिए उठाए गए इस कड़े कदम के तहत, 18 अगस्त से 9 सितंबर 2026 के बीच विशेष टीमों ने कुल 2,564 PoP मूर्तियों को जब्त किया है।

इस पूरे ऑपरेशन का निर्देशन वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री रामलिंगा रेड्डी द्वारा किया गया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी क्षेत्र छूट न जाए, प्रत्येक जिले में चार से पांच विशेष प्रवर्तन टीमों के गठन का आदेश दिया था। इन टीमों ने स्थानीय पुलिस और विभिन्न सरकारी विभागों के सहयोग से उन ठिकानों पर छापेमारी की जहां अवैध निर्माण और भंडारण किया जा रहा था।

अभियान का विस्तार

इस कार्रवाई के दौरान 357 दुकानों और गोदामों की गहन जांच की गई। यह अभियान केवल राजधानी तक सीमित नहीं था, बल्कि बेंगलुरु अर्बन, मैसूरु, मंगलुरु, बेलगावी और उडुपी सहित कई अन्य जिलों में चलाया गया। इतनी बड़ी संख्या में मूर्तियों की जब्ती यह दर्शाती है कि बाजार में अभी भी पर्यावरण के अनुकूल विकल्पों के बजाय सस्ते और हानिकारक PoP का बोलबाला है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, PoP मूर्तियों का उपयोग हर साल एक गंभीर पारिस्थितिक संकट पैदा करता है। प्राकृतिक मिट्टी के विपरीत, PoP पानी में आसानी से नहीं घुलता और इसमें मौजूद भारी धातुएं और रासायनिक रंग जलीय जीवन को जहरीला बना देते हैं। आपूर्ति श्रृंखला (निर्माण और बिक्री) पर प्रहार करके, कर्नाटक सरकार जनता को बायोडिग्रेडेबल मिट्टी की मूर्तियों की ओर ले जाने का प्रयास कर रही है।

मिट्टी की मूर्तियों को अपनाना अब केवल एक विकल्प नहीं बल्कि हमारी शहरी झीलों के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है।

सरकार ने PoP मूर्तियों के निर्माण, परिवहन, बिक्री और विसर्जन पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। मंत्री रेड्डी ने नागरिकों से अपील की है कि वे जल प्रदूषण और कचरे को कम करने के लिए केवल मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग करें।

क्या आप जानते हैं?: प्लास्टर ऑफ पेरिस एक जिप्सम-आधारित उत्पाद है जिसे पानी में घुलने में कई साल लग सकते हैं, जिससे झीलों की तलहटी में एक मोटी परत जम जाती है जो जलीय जीवों का दम घोंट देती है।
विशेषताPoP मूर्तियांमिट्टी की (इको-फ्रेंडली) मूर्तियां
बायोडिग्रेडेबिलिटीगैर-बायोडिग्रेडेबल / बहुत धीमीतेजी से घुलनशील
जल पर प्रभावजहरीले रसायन, ऑक्सीजन की कमीप्राकृतिक अवसाद, हानिरहित
कानूनी स्थितिकर्नाटक में प्रतिबंधितप्रोत्साहित/कानूनी

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: गणेश मूर्तियों के लिए प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) पर प्रतिबंध क्यों है?
PoP गैर-बायोडिग्रेडेबल है और इसमें ऐसे रसायन होते हैं जो जल निकायों को प्रदूषित करते हैं और मछलियों सहित अन्य जलीय जीवों को नुकसान पहुँचाते हैं।

प्रश्न 2: कर्नाटक के किन जिलों में यह प्रवर्तन अभियान चलाया गया?
यह अभियान बेंगलुरु अर्बन, मैसूरु, मंगलुरु, बेलगावी और राज्य के कई अन्य प्रमुख जिलों में चलाया गया।