असम में वन्यजीव विशेषज्ञ हाथियों पर बढ़ते मानव-निर्मित खतरों से जूझ रहे हैं, जहाँ हाल ही में हाथियों को ट्रक के टायरों, तार के फंदों और गहरे गड्ढों से बचाया गया।

  • हालिया बचाव कार्यों में एक हाथी को गर्दन में फंसे ट्रक टायर और दूसरे को तार के फंदे से मुक्त कराया गया।
  • सेकोनी टी एस्टेट में एक 4-6 सप्ताह के हाथी के बच्चे को गहरे गड्ढे से निकाला गया।
  • कचरा और हाथियों को रोकने के लिए खोदे गए गड्ढे वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन रहे हैं।

असम राज्य में एक चिंताजनक प्रवृत्ति देखी जा रही है जहाँ हाथी तेजी से मानव-निर्मित या मानव-प्रेरित खतरों का शिकार हो रहे हैं। सिलसिलेवार घटनाओं में, वन्यजीव विशेषज्ञों को इन विशालकाय जीवों को मानव-निर्मित जाल और कचरे से बचाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा है, जो उनके प्राकृतिक आवास को प्रदूषित कर रहे हैं।

गोलाघाट जिले के बुखियाल टी एस्टेट में एक किशोर हाथी देखा गया, जिसकी गर्दन में ट्रक का टायर बुरी तरह फंसा हुआ था। जानवर काफी तनाव में था और टायर को हटाने की कोशिश कर रहा था। गोलाघाट वन प्रभाग और काजीरंगा के पास स्थित वन्यजीव पुनर्वास और संरक्षण केंद्र (CWRC) की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची। हाथी को रासायनिक रूप से बेहोश करने के बाद सावधानीपूर्वक टायर निकाला गया, जिसके बाद वह अपने झुंड में वापस लौट गया।

यह घटना रैमोना नेशनल पार्क के बाहरी इलाके में हुई एक अन्य घटना के कुछ ही दिनों बाद हुई है, जहाँ एक मादा हाथी की सूंड तार के जाल (स्नेयर) में फंस गई थी। ऐसे जाल अक्सर शिकारियों द्वारा लगाए जाते हैं, जो हाथियों जैसे बड़े स्तनधारियों के लिए घातक साबित होते हैं और गहरे घाव का कारण बनते हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि औद्योगिक चाय बागानों और वन्यजीव गलियारों का मिलन एक 'डेथ ट्रैप' (मौत का जाल) बना रहा है। चाय बागानों में हाथियों को रोकने के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे—जो फसलों की रक्षा के लिए बनाए जाते हैं—अक्सर बच्चों के लिए घातक साबित होते हैं, जैसा कि काजीरंगा के पास सेकोनी टी एस्टेट में देखा गया।

"हालांकि हम हमेशा जंगली झुंड के साथ पुनर्मिलन को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन पुनर्वास इन संकटग्रस्त जानवरों को एक शत्रुतापूर्ण वातावरण में जीवन का दूसरा मौका देता है।"

एक 4-6 सप्ताह के हाथी के बच्चे का कीचड़ भरे गड्ढे से बचाव युवा हाथियों की संवेदनशीलता को दर्शाता है। निर्जलीकरण और मांसपेशियों की गंभीर थकान से जूझ रहे इस बच्चे को उसके झुंड ने छोड़ दिया था, क्योंकि वे उसे बाहर निकालने में असमर्थ थे। इस बच्चे को अब CWRC में भर्ती कराया गया है, जहाँ वह अन्य बचाए गए हाथियों के साथ पुनर्वास कार्यक्रम का हिस्सा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

असम लंबे समय से मानव-हाथी संघर्ष (HEC) से जूझ रहा है। ऐतिहासिक रूप से, चाय बागानों के विस्तार और शहरी बुनियादी ढांचे के कारण जंगलों के विखंडन ने हाथियों को मानव बस्तियों की ओर धकेला है। हालांकि राज्य ने विभिन्न शमन रणनीतियां लागू की हैं, लेकिन फेंके गए टायर और अवैध फंदों जैसे 'अदृश्य' खतरों का बढ़ना हाथियों की आबादी के लिए खतरे की एक नई परत पेश करता है।

क्या आप जानते हैं?: हाथी अत्यधिक सामाजिक प्राणी होते हैं; गड्ढे में बच्चे का परित्याग एक दुर्लभ और हताशापूर्ण घटना है, जो आमतौर पर तभी होती है जब पूरे झुंड का अस्तित्व खतरे में हो।

हालिया मानव-निर्मित खतरों की तुलना

खतरे का प्रकारस्थानप्रभावपरिणाम
ट्रक टायरगोलाघाटगर्दन का संकुचनसफलतापूर्वक मुक्त
तार का फंदारैमोना नेशनल पार्कसूंड में चोटउपचार और रिहाई
गहरा गड्ढासेकोनी एस्टेटअलगाव/थकानCWRC में पुनर्वास

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: चाय बागानों के चारों ओर गहरे गड्ढे क्यों खोदे जाते हैं?
उत्तर: इन्हें एक भौतिक बाधा के रूप में डिजाइन किया गया है ताकि हाथियों को बागानों में घुसने और चाय की फसलों को नष्ट करने से रोका जा सके।

प्रश्न: इन बचाव कार्यों में CWRC की क्या भूमिका है?
उत्तर: वन्यजीव पुनर्वास और संरक्षण केंद्र घायल या अनाथ वन्यजीवों को विशेष पशु चिकित्सा देखभाल और एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है ताकि उन्हें वापस जंगल में छोड़ा जा सके।