भारत 2047 तक 100 GW परमाणु शक्ति हासिल करने का लक्ष्य रख रहा है, ताकि तेज़ी से बढ़ती AI, चिप और डेटा‑सेंटर की बिजली माँग को पूरा किया जा सके। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बड़े रिएक्टर और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) दोनों पर समान रूप से बल दिया जा रहा है।
मुख्य बिंदु
- भारत 2047 तक 100 GW परमाणु क्षमता हासिल करना चाहता है।
- AI, चिप्स और डेटा‑सेंटर जैसी उभरती तकनीकों के लिए बड़ी मात्रा में बिजली आवश्यक है।
- सरकार बड़े रिएक्टर के साथ‑साथ छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) को तेज़ी से लागू करने की योजना बना रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में कहा कि भविष्य की तकनीकों—जैसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), सेमी‑कंडक्टर और डेटा‑सेंटर—की बढ़ती मांग के कारण बिजली की माँग में तीव्र वृद्धि होगी। उन्होंने 2047 तक 100 GW परमाणु शक्ति हासिल करने और इस दशक में पाँच नए रिएक्टर कमिशन करने का लक्ष्य घोषित किया।
परमाणु क्षेत्र की वर्तमान स्थिति
भारत के पास वर्तमान में 25 कार्यरत परमाणु रिएक्टर (कुल 8.7 GWe) हैं, जबकि 10 रिएक्टर (लगभग 8 GWe) निर्माणाधीन हैं। अतिरिक्त 10 इकाइयों की योजना पूर्व‑परियोजना चरण में है, जो लगभग 6.6 GWe क्षमता जोड़ेंगी। यह मौजूदा बुनियादी ढाँचा बड़े‑पैमाने के रिएक्टर पर आधारित है, पर सरकार SMR को तेज़ी से तैनात करने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही है।
SMR (छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर) पर विशेष ध्यान
भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) ने तीन प्रकार के SMR विकसित किए हैं: 200 MWe का भारत SMR‑200, 55 MWe का छोटा मॉड्यूलर रिएक्टर, और 5 MWt हाई‑टेम्परेचर गैस‑कूल्ड रिएक्टर जो हाइड्रोजन उत्पादन के लिए उपयोगी है। सरकार ने SMR विकास के लिए 20,000 crore रुपये का बजट आवंटित किया है और विदेशी निवेश एवं तकनीकी सहयोग की तलाश में है।
| पैरामीटर | बड़े रिएक्टर (LWR) | छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) |
|---|---|---|
| कुशलता | उच्च, पर लागत अधिक | मध्यम, पर निर्माण तेज़ |
| स्थापना समय | 10‑12 वर्ष | 3‑5 वर्ष |
| निवेश लागत (प्रति GW) | ₹12,000 crore | ₹6,000 crore |
| उपयोग | बेसलोड पावर | बेसलोड + ग्रिड लचीलापन |
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that achieving the 100 GW target will not only secure India’s energy independence but also position the country as a global hub for AI‑driven manufacturing and data‑intensive services.
"परमाणु ऊर्जा का तेज़ विस्तार भारत को AI और चिप्स जैसे भविष्य‑उन्मुख सेक्टरों में प्रतिस्पर्धी बनाएगा," कहा ऊर्जा विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या SMR वास्तव में बड़े रिएक्टरों की तुलना में अधिक किफायती हैं?
A: हाँ, कम निर्माण समय और कम प्रारंभिक पूंजी निवेश के कारण SMR अक्सर बड़े रिएक्टरों से अधिक आर्थिक होते हैं।
Q2: भारत की 100 GW लक्ष्य को पूरा करने में निजी क्षेत्र की क्या भूमिका होगी?
A: शांति अधिनियम (SHANTI Act) के तहत निजी निवेशकों को लाइसेंस, सुरक्षा निगरानी और दायित्व प्रबंधन में भाग लेने की अनुमति मिलेगी, जिससे पूँजी एवं तकनीक का प्रवाह तेज़ होगा।