भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार ने पुरानी गाड़ियों की सुरक्षा और संभावित खाद्य संकट को रोकने के लिए सरकार से E10 पेट्रोल को फिर से शुरू करने का आग्रह किया है।
- मुख्य आर्थिक सलाहकार ने पुरानी गाड़ियों की अनुकूलता के लिए E10 पेट्रोल की सिफारिश की।
- चेतावनी दी कि 30% एथेनॉल मिश्रण से देश में खाद्य संकट पैदा हो सकता है।
- बिना पर्याप्त बुनियादी ढांचे के E20 ईंधन की ओर तेजी से बढ़ने पर चिंता जताई।
भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) ने E10 पेट्रोल की वापसी की वकालत करके पेट्रोलियम और वित्त मंत्रालयों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। जैसे-जैसे देश तेल आयात कम करने के लिए एथेनॉल मिश्रण की मात्रा बढ़ा रहा है, CEA ने उन लाखों मध्यम वर्गीय नागरिकों की व्यावहारिक समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित किया है जिनकी पुरानी गाड़ियां उच्च एथेनॉल सांद्रता को सहन नहीं कर सकतीं।
वर्तमान में, E20 ईंधन (20% एथेनॉल मिश्रण) भारत की हरित ऊर्जा रणनीति का मुख्य हिस्सा है। हालांकि, पुराने आंतरिक दहन इंजन (ICE) उच्च एथेनॉल स्तरों के लिए नहीं बने हैं, जिससे रबर सील और फ्यूल लाइनों में क्षरण (corrosion) हो सकता है, जो अंततः इंजन को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। CEA की यह सलाह सुनिश्चित करने का एक प्रयास है कि टिकाऊ ईंधन की ओर संक्रमण आम आदमी की गतिशीलता की कीमत पर न हो।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि सरकार के भीतर यह मतभेद पर्यावरणीय नीति और जमीनी बुनियादी ढांचे के बीच एक गहरे अंतर को उजागर करता है। जहां पेट्रोलियम मंत्रालय कार्बन फुटप्रिंट कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, वहीं वित्त मंत्रालय के सलाहकार आर्थिक बोझ और खाद्य मुद्रास्फीति के जोखिम पर ध्यान दे रहे हैं। यदि सरकार E10 की आवश्यकता को नजरअंदाज करती है, तो आबादी के एक बड़े वर्ग को समय से पहले वाहन बदलने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे मध्यम वर्ग की वित्तीय स्थिति और खराब होगी।
ऊर्जा सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा के बीच संतुलन बहुत नाजुक है; एथेनॉल मिश्रण को बहुत अधिक बढ़ाने का जोखिम यह है कि हम भूखों की कीमत पर अनाज को ईंधन में बदल देंगे।
ऑटोमोटिव प्रभाव के अलावा, CEA ने 'भोजन बनाम ईंधन' (Food-vs-Fuel) की दुविधा पर लाल झंडी दिखाई है। एथेनॉल मिश्रण को 30% तक बढ़ाने के लिए गन्ने और मक्के की भारी मात्रा की आवश्यकता होगी। खाद्य आपूर्ति श्रृंखला से कृषि उत्पादों का यह विचलन खाद्य कीमतों में भारी उछाल ला सकता है, जिससे पहले से ही महंगाई से जूझ रहे देश में खाद्य संकट पैदा हो सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत का एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम विदेशी कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए वर्षों पहले शुरू हुआ था। E5 से E10 और अब E20 की ओर यह यात्रा बहुत आक्रामक रही है। जबकि आधुनिक BS-VI वाहन काफी हद तक E20 के अनुकूल हैं, 2023 से पहले निर्मित लाखों वाहन असुरक्षित हैं, जिससे भारतीय बाजार में एक 'ईंधन विभाजन' पैदा हो गया है।
| ईंधन का प्रकार | एथेनॉल % | वाहन अनुकूलता | मुख्य जोखिम |
|---|---|---|---|
| E10 | 10% | उच्च (ज्यादातर पुरानी/नई कारें) | कम |
| E20 | 20% | मध्यम (नए मॉडल) | पुराने इंजन में क्षरण |
| E30 (प्रस्तावित) | 30% | कम (विशेष वाहन) | खाद्य सुरक्षा संकट |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या E20 पेट्रोल मेरी पुरानी कार को नुकसान पहुंचाएगा?
हाँ, उच्च एथेनॉल सांद्रता रबर के हिस्सों को खराब कर सकती है और उन इंजनों में धातु के क्षरण का कारण बन सकती है जो विशेष रूप से E20 के लिए नहीं बने हैं।
प्रश्न 2: एथेनॉल मिश्रण का खाद्य संकट से क्या संबंध है?
क्योंकि एथेनॉल मक्के और गन्ने जैसी फसलों से निकाला जाता है; इनका उपयोग ईंधन के लिए करने से भोजन की उपलब्धता कम हो जाती है, जिससे कीमतें बढ़ जाती हैं।