केरल सरकार ने शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और बस स्टैंड जैसी आय-सृजन परियोजनाओं के लिए ऋण लेने वाले स्थानीय निकायों के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। अब ऋण की राशि परियोजना के अनुमानित मूल्य से अधिक नहीं होगी और पुनर्भुगतान में चूक होने पर सामान्य उद्देश्य निधि से कटौती की जाएगी।

  • ऋण राशि परियोजना के अनुमानित बजट से अधिक नहीं हो सकती।
  • लोन चुकाने के लिए एस्क्रो अकाउंट अनिवार्य, चूक होने पर जनरल पर्पज फंड से होगी वसूली।
  • PRICE सॉफ्टवेयर के माध्यम से विस्तृत योजना और डिजाइन जमा करना अनिवार्य।
  • नकारात्मक बैलेंस वाले निकायों के आवेदनों को सीधे खारिज किया जाएगा।

तिरुवनंतपुरम: केरल सरकार ने स्थानीय स्वशासन निकायों (LSGD) के लिए वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने उन दिशानिर्देशों को संशोधित किया है जिनके तहत स्थानीय निकाय शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, बस स्टैंड और बाजारों जैसे राजस्व-जनरेटिंग प्रोजेक्ट्स के लिए ऋण लेते हैं। वर्तमान में, कई निकाय सरकार की पूर्व मंजूरी के बाद केरल अर्बन एंड रूरल डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (KURDFC) के माध्यम से ऋण प्राप्त करते हैं।

नए आदेश के अनुसार, सरकार ऋण पुनर्भुगतान के लिए किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान नहीं करेगी। यदि कोई स्थानीय निकाय ऋण चुकाने में विफल रहता है, तो एक विभागीय जांच की जाएगी और बकाया राशि को सीधे उस निकाय के सामान्य उद्देश्य निधि (General Purpose Fund) से काटकर वित्तीय संस्थान को सौंप दिया जाएगा। यह कदम उन निकायों को जवाबदेह बनाने के लिए उठाया गया है जो वित्तीय प्रबंधन में लापरवाही बरत रहे थे।

क्यों आवश्यक था यह बदलाव?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह संशोधन प्रशासनिक विफलता और वित्तीय कुप्रबंधन को रोकने के लिए किया गया है। कई स्थानीय निकायों में आय की तुलना में खर्च अधिक पाया गया, आरक्षित निधि की कमी देखी गई और परियोजनाओं के कार्यान्वयन में अत्यधिक देरी हुई। इसके अलावा, यह पाया गया कि कुछ निकाय एस्क्रो अकाउंट में परियोजना से होने वाली आय जमा नहीं कर रहे थे, जो ऋण चुकौती के लिए अनिवार्य था।

"स्थानीय निकायों को स्वायत्तता देना आवश्यक है, लेकिन वित्तीय जवाबदेही के बिना यह स्वायत्तता राजकोषीय संकट का कारण बन सकती है।"

संशोधित नियमों के तहत, ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं को अब PRICE सॉफ्टवेयर का उपयोग करके विस्तृत योजना, डिजाइन और अनुमान तैयार करना होगा। इन दस्तावेजों को अधिकृत अधिकारी से मंजूरी मिलने के बाद संबंधित वित्तीय संस्थान को निरीक्षण के लिए भेजा जाएगा। इसके अतिरिक्त, निकायों को एक सहमति पत्र भी देना होगा कि चूक की स्थिति में सरकार उनके फंड से कटौती कर सकती है।

प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए, अब सभी आवेदन संयुक्त निदेशक, LSGD को जमा किए जाएंगे। यदि किसी निकाय का बैलेंस नेगेटिव है, तो आवेदन को तुरंत खारिज कर दिया जाएगा। साथ ही, टेंडर प्रक्रिया तभी शुरू की जा सकेगी जब सरकार से ऋण लेने की सैद्धांतिक मंजूरी मिल जाएगी।

क्या आप जानते हैं?: PRICE सॉफ्टवेयर का उपयोग केरल में बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के लिए सटीक लागत अनुमान और मानक डिजाइन सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: यदि स्थानीय निकाय ऋण नहीं चुका पाता है तो क्या होगा?
उत्तर: ऐसी स्थिति में, सरकार निकाय के सामान्य उद्देश्य निधि (General Purpose Fund) से ऋण राशि की वसूली करेगी।

प्रश्न 2: क्या सरकार ऋण चुकाने के लिए फंड देगी?
उत्तर: नहीं, नए दिशानिर्देशों के अनुसार, ऋण पुनर्भुगतान के लिए सरकार की ओर से कोई फंड नहीं दिया जाएगा।