जादवपुर विश्वविद्यालय में रैगिंग के कारण हुई छात्र की मौत के तीन साल बाद भी परिवार न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है। पिता ने सवाल उठाया है कि विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच में नाम आने के बावजूद कई आरोपी अब तक क्यों नहीं पकड़े गए।

मुख्य बातें

  • जादवपुर विश्वविद्यालय के हॉस्टल में 17 वर्षीय छात्र की रैगिंग के बाद मौत।
  • 12 आरोपी हिरासत में हैं, लेकिन आंतरिक जांच में नाम आने वाले अन्य लोग फरार हैं।
  • कोर्ट में सुनवाई बार-बार टलने से पीड़ित परिवार में भारी निराशा।

जादवपुर विश्वविद्यालय के मुख्य हॉस्टल में तीन साल पहले हुई एक हृदयविदारक घटना ने आज भी न्याय व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया है। 9 अगस्त, 2023 को एक 17 वर्षीय छात्र की हॉस्टल की दूसरी मंजिल से गिरने से मौत हो गई थी, जिसे कथित तौर पर वरिष्ठ छात्रों द्वारा मानसिक उत्पीड़न और रैगिंग का शिकार बनाया गया था।

पीड़ित के पिता, जो अब तक अदालती चक्कर और पुलिस थानों के बीच भटक रहे हैं, ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि न्याय उनसे कोसों दूर है। उन्होंने बताया कि पोक्सो (POCSO) अदालत में सुनवाई के दौरान अक्सर आरोपी उपस्थित नहीं होते और तारीखें आगे बढ़ा दी जाती हैं। पिता का सवाल है कि जब विश्वविद्यालय की अपनी आंतरिक जांच में कई अन्य लोगों के नाम सामने आए थे, तो उन्हें अब तक सजा क्यों नहीं मिली?

क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला केवल एक छात्र की मृत्यु का नहीं है, बल्कि शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त 'रैगिंग संस्कृति' और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक है। यदि विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच के निष्कर्षों पर पुलिस कार्रवाई नहीं की जाती, तो यह संस्थागत जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

"न्याय में देरी, न्याय की हत्या के समान है, विशेषकर तब जब पीड़ित का परिवार व्यवस्था के भरोसे बैठा हो।"

इस घटना के बाद विश्वविद्यालय ने छात्रावासों को जूनियर और सीनियर छात्रों के लिए अलग-अलग कर दिया है, ताकि टकराव को रोका जा सके। हालांकि, छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हॉस्टल के भीतर अभी भी वरिष्ठों का दबदबा है, जहाँ छात्रों को उनके पहनावे से लेकर अन्य व्यक्तिगत मांगों तक पर नियंत्रण रखा जाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल में शैक्षणिक संस्थानों में होने वाली हिंसा और उत्पीड़न की घटनाएं हाल के वर्षों में बढ़ी हैं। जादवपुर मामले के एक साल बाद, आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज में हुई डॉक्टर की बलात्कार और हत्या की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। ये दोनों मामले दिखाते हैं कि कैसे बड़े संस्थानों में सुरक्षा और अनुशासन की कमी छात्रों के जीवन के लिए घातक साबित हो रही है।

क्या आप जानते हैं?: रैगिंग को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित 'राघवन समिति' ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनका पालन अभी भी एक चुनौती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

1. जादवपुर विश्वविद्यालय मामले में अब तक कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
कोलकाता पुलिस अब तक इस मामले में 12 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

2. पीड़ित के पिता की मुख्य मांग क्या है?
पिता की मुख्य मांग है कि विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच में शामिल अन्य सभी दोषियों पर भी कानूनी कार्रवाई की जाए।