आरबीआई की विशेष स्वैप विंडो के तहत NRIs ने FCNR(B) जमा में जबरदस्त बढ़ोतरी की है। HSBC ने $5 बिलियन से अधिक जमा जुटाए, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में नई लहरें उठी हैं।
मुख्य बिंदु
- NRIs ने RBI के विशेष विंडो का उपयोग कर FCNR(B) जमा में $20 बिलियन से अधिक की वृद्धि की।
- HSBC ने इस योजना के तहत $5 बिलियन से अधिक जमा mobilised किए।
- वृद्धि ने RBI को रिकॉर्ड FX फॉरवर्ड बुक को कम करने में मदद दी।
आरबीआई ने नवंबर 2023 में एक विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप विंडो खोली, जिसका उद्देश्य NRI निवेशकों को डॉलर‑आधारित FCNR(B) जमा बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना था। इस योजना के तहत निवेशकों को आकर्षक लेवरज और रिवॉर्ड मिलते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा प्रवाह में तेज़ी आई।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रवाह ने RBI को अपने रिकॉर्ड FX फॉरवर्ड बुक को घटाने में मदद की। डॉलर जमा का कुल वॉल्यूम $20 बिलियन से अधिक हो गया, जो पिछले साल की तुलना में दो गुना से अधिक है।
HSBC ने इस विशेष विंडो के तहत सबसे अधिक जमा mobilised किए, $5 बिलियन से अधिक की राशि जमा कराई। इसके बाद अन्य प्रमुख बैंकों ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाए, जिससे कुल मिलाकर भारतीय वित्तीय प्रणाली में विदेशी मुद्रा की स्थिरता बढ़ी।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
FCNR(B) (Foreign Currency Non‑Resident) खाते 1970 के दशक में शुरू हुए थे, जिससे NRIs को विदेशी मुद्रा में बचत करने की सुविधा मिली। 2000 के बाद से RBI ने विभिन्न नियामक कदम उठाए, लेकिन 2023 की विशेष विंडो ने इस प्रॉडक्ट को नई ऊँचाइयों पर पहुंचाया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस प्रकार की रणनीतिक विंडो न केवल विदेशी मुद्रा की आपूर्ति को स्थिर करती है, बल्कि भारत की वित्तीय स्थिरता को भी सुदृढ़ बनाती है। यह प्रवाह RBI को भविष्य के संभावित मुद्रा जोखिमों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
"RBI की विशेष विंडो ने NRI निवेशकों को एक आकर्षक लीवरेज प्रदान किया, जिससे विदेशी मुद्रा जमा में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई।" – वित्तीय विश्लेषक अनीता शर्मा
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: क्या सभी NRIs इस विशेष विंडो का लाभ उठा सकते हैं?
उत्तर: हाँ, लेकिन उन्हें RBI द्वारा निर्धारित न्यूनतम जमा मानदंड और दस्तावेज़ीकरण पूरा करना होगा।
प्रश्न 2: इस योजना का भारतीय रुपये पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: बढ़ते डॉलर जमा से भारतीय रुपये पर समर्थन मिलता है, जिससे विनिमय दर में स्थिरता आती है।