भारत सरकार ने जनगणना 2027 के दूसरे चरण का विस्तृत शेड्यूल प्रकाशित किया। लद्दाख, जम्मू‑कश्मीर के बर्फ‑प्रभावित इलाके, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में 1 सेप्टेम्बर से 30 सेप्टेम्बर तक गणना होगी, जबकि 17 अगस्त से ऑनलाइन सेल्फ‑एन्युमेरेशन खोल दिया गया है।

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मुख्य बिंदु

  • जनगणना 2027 के दूसरे चरण का शेड्यूल जारी
  • पहाड़ी क्षेत्रों में 1 सेप्टेम्बर‑30 सेप्टेम्बर तक गणना
  • 17 अगस्त से ऑनलाइन सेल्फ‑एन्युमेरेशन शुरू

शेड्यूल का विस्तृत विवरण

भारत के गृह मंत्रालय ने जनगणना 2027 के लिए नोटिफिकेशन जारी किया, जिसमें लद्दाख, जम्मू‑कश्मीर के बर्फ‑प्रभावित जिलों तथा हिमाचल प्रदेश‑उत्ताराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में 1 सेप्टेम्बर 2026 से 30 सेप्टेम्बर 2026 तक जनसंख्या गणना की जाएगी। डेटा वेरिफिकेशन 1 अक्टूबर‑5 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा और रेफरेंस डेट 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित है।

ऑनलाइन सेल्फ‑एन्युमेरेशन का विकल्प

17 अगस्त 2026 से 31 अगस्त 2026 तक नागरिक स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे। यह पहल क्षेत्रीय कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए डिजिटल समाधान प्रदान करती है, जिससे फील्ड कॉस्ट घटेगा और डेटा की सटीकता बढ़ेगी।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the early rollout of self‑enumeration in remote hill districts will set a precedent for future censuses, potentially reducing enumeration time by up to 20 % and improving demographic granularity for policy planning.

"सेल्फ‑एन्युमेरेशन के कारण डेटा की विश्वसनीयता बढ़ेगी और ग्रामीण‑शहरी अंतर को बेहतर समझा जा सकेगा," कहा राष्ट्रीय जनगणना आयुक्त ने।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछला राष्ट्रीय जनगणना 2011 में पारंपरिक घर‑घर सर्वेक्षण पर आधारित था, जबकि 2021 में डिजिटल पहल के रूप में मोबाइल एप्लिकेशन का परीक्षण किया गया। 2027 का शेड्यूल इस अनुभव को आगे बढ़ाते हुए, शहरी‑ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में डिजिटल कलेक्शन को मुख्यधारा बनाता है।

Did You Know?: 2027 की जनगणना में प्रथम बार सभी भारतीय नागरिकों को मोबाइल‑आधारित सेल्फ‑एन्युमेरेशन का विकल्प मिलेगा।

Frequently Asked Questions

  • ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कब तक खुला रहेगा? रजिस्ट्रेशन 31 अगस्त 2026 को बंद हो जाएगा।
  • कौन‑से क्षेत्रों में यह शेड्यूल लागू होगा? लद्दाख, बर्फ‑प्रभावित जम्मू‑कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में।