राज्यसभा में सांसद सुदर्शन सिंह नगर के प्रश्न के बाद केंद्र ने बताया कि DGCA ने स्वचालित देरी मुआवजा तंत्र नहीं अपनाया और 2025 में एयरलाइन को कुल 21.46 करोड़ रुपये का खर्च हुआ।
मुख्य बिंदु
- DGCA ने स्वचालित मुआवजा तंत्र नहीं अपनाया
- 2025 में एयरलाइन को 21.46 करोड़ रुपये का खर्च
- केन्द्र ने 20 लाख यात्रियों को संभावित नुकसान बताया
इतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में उड़ान देरी मुआवजा नियम 2019 में लागू हुए, जब DGCA ने प्रथम बार यात्रियों को देरी के लिए आर्थिक हर्जाने की सीमा निर्धारित की। तब से कई बार संशोधन हुए, पर स्वचालित भुगतान प्रणाली अभी तक नहीं आई।
वर्तमान स्थिति
राज्यसभा में सांसद सुरेन्द्र सिंह नगर ने पूछताछ की कि क्या DGCA ने स्वचालित मुआवजा तंत्र पर विचार किया है। उत्तर में केंद्र ने स्पष्ट किया कि ऐसी कोई योजना वर्तमान में नहीं है और 2025 में कुल मिलाकर एयरलाइन को ₹21.46 करोड़ सुविधा और मुआवजा के रूप में खर्च करना पड़ा।
केन्द्र के आंकड़े दर्शाते हैं कि 2025 में लगभग 20 लाख यात्रियों को संभावित देरी मुआवजा नहीं मिला, जिससे आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया गया है।
भविष्य की संभावनाएँ
यदि स्वचालित तंत्र नहीं लाया गया, तो एयरलाइन को भविष्य में भी बड़ी मात्रा में प्रशासनिक और वित्तीय बोझ झेलना पड़ेगा। यह स्थिति यात्रियों के विश्वास को भी प्रभावित कर सकती है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the absence of an automated compensation mechanism could increase operational costs for airlines by up to 15% and erode consumer confidence in India's aviation sector.
"स्वचालित मुआवजा प्रणाली न केवल यात्रियों को तुरंत राहत देती, बल्कि एयरलाइन के लिए भी लागत‑प्रभावी समाधान है," कहा aviation analyst राकेश वर्मा ने।
Frequently Asked Questions
- स्वचालित मुआवजा तंत्र क्यों नहीं लागू हुआ? वर्तमान में DGCA की नीति में तकनीकी और नियामक बाधाएँ हैं, जिससे इसे तुरंत लागू करना कठिन है।
- यात्रियों को मुआवजा कैसे प्राप्त होगा? मौजूदा प्रक्रिया में यात्रियों को एयरलाइन से प्रत्यक्ष आवेदन करके मुआवजा मिलना होता है, जिसमें कई बार देरी होती है।