रोहतक जिला उपभोक्ता आयोग ने एक अमेरिकी मोबाइल निर्माता को ₹45,500 की रिफंड और मानसिक कष्ट के लिए अतिरिक्त ₹10,000 का भुगतान करने का आदेश दिया। अदालत ने कंपनी के बिना प्रमाणित ‘अनधिकृत टैंपरिंग’ के दावे को खारिज कर दिया।

मुख्य बिंदु

  • निर्माता ने अनधिकृत टैंपरिंग का कोई ठोस प्रमाण नहीं दिया।
  • आयोग ने ₹45,500 रिफंड और ₹10,000 क्षतिपूर्ति आदेशित की।
  • राय से स्पष्ट हुआ कि वॉरंटी सेवा को रोकने के लिये तकनीकी साक्ष्य अनिवार्य है।

पृष्ठभूमि

रोज़गार वकील राजबीर फोगाट ने जनवरी 2024 में ₹64,999 में खरीदा गया iPhone लगातार ओवरहीटिंग, ब्लूटूथ कनेक्टिविटी, कॉल ड्रॉप और नेटवर्क समस्याओं से ग्रस्त रहा। कई बार सर्विस सेंटर की यात्रा, सॉफ़्टवेयर अपडेट और नेटवर्क बदलने के बाद भी समस्या बनी रही।

आयोग का निर्णय

रोहतक जिला उपभोक्ता आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि मोबाइल निर्माता ने ‘अनधिकृत टैंपरिंग’ के दावे को समर्थन देने के लिये कोई स्वतंत्र तकनीकी प्रमाण नहीं प्रस्तुत किया। इसलिए, कंपनी को ₹45,500 रिफंड और मानसिक कष्ट व मुकदमे के खर्च के लिये कुल ₹10,000 का भुगतान करने का आदेश दिया गया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारतीय उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986, उपभोक्ताओं को दोषपूर्ण वस्तुओं के खिलाफ उचित राहत प्रदान करता है। इस निर्णय ने यह सिद्ध किया कि निर्माता को वारंटी से बाहर करने के लिये ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत करना अनिवार्य है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this ruling sets a precedent for demanding transparent technical evidence from manufacturers before denying warranty claims, strengthening consumer confidence across India.

"उपभोक्ता को केवल शब्दों के आधार पर नुकसान नहीं उठाना चाहिए; हर दावे को प्रमाणित करना चाहिए," कहा उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञ ने।
क्या आप जानते हैं?: भारत में 2023 में ही उपभोक्ता शिकायतों में 12% वृद्धि देखी गई, मुख्यतः इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या मैं भी अपने दोषपूर्ण फोन के लिए समान राहत प्राप्त कर सकता हूँ?
उत्तर: हाँ, यदि आप तकनीकी प्रमाण के बिना वारंटी से इनकार किए गए हैं तो आप अपने क्षेत्र के उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

प्रश्न 2: इस निर्णय में निर्धारित ₹55,500 का क्या महत्व है?
उत्तर: यह राशि मुख्य रिफंड (₹45,500) और अतिरिक्त क्षतिपूर्ति (₹10,000) तथा मुकदमे के खर्च (₹5,000) को सम्मिलित करती है, जो उपभोक्ता को हुए नुकसान की पूर्ण भरपाई दर्शाती है।