कर्नाटक विधानमंडल की उप-विधायी समिति ने पिलिकुला निसर्गधाम के कुप्रबंधन और सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी दी है कि यदि सुधार नहीं हुआ तो यह महत्वपूर्ण पारिस्थितिक स्थल बंद हो सकता है।
मुख्य बातें
- विधायकों ने पिलिकुला विकास प्राधिकरण के कामकाज पर सवाल उठाए।
- विभिन्न सरकारी विभागों के बीच समन्वय की भारी कमी पाई गई।
- वैज्ञानिक अनुसंधान और सांस्कृतिक गतिविधियों की अनदेखी का आरोप।
- प्रबंधन में सुधार न होने पर पार्क बंद होने की चेतावनी।
मंगलुरु के प्रसिद्ध पिलिकुला निसर्गधाम के भविष्य को लेकर कर्नाटक विधानमंडल की उप-विधायी समिति ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। हाल ही में आयोजित एक बैठक में, समिति के अध्यक्ष और विधायक एस. आर. श्रीनिवास के नेतृत्व में, कानून निर्माताओं ने पिलिकुला विकास प्राधिकरण के विफल प्रबंधन की कड़ी आलोचना की।
समिति के सदस्यों का कहना है कि प्राधिकरण पिलिकुला की क्षमता का उपयोग इसे एक प्रमुख पारिस्थितिक, वैज्ञानिक अनुसंधान, शैक्षिक और सांस्कृतिक पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने के लिए करने में पूरी तरह विफल रहा है। विधायक मंतर गौड़ा ने प्राधिकरण के मूल उद्देश्यों से भटकने पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अब वहां पारिस्थितिक मामलों पर कोई वैज्ञानिक अनुसंधान हो भी रहा है या नहीं।
यह क्यों मायने रखता है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पिलिकुला केवल एक पार्क नहीं है, बल्कि पश्चिमी घाट की वनस्पतियों और जीवों के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यदि प्रशासनिक लापरवाही जारी रहती है, तो यह न केवल पर्यटन को प्रभावित करेगा बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता के संरक्षण के मिशन को भी खतरे में डाल देगा।
प्रशासनिक सुस्ती और विभागों के बीच तालमेल की कमी पिलिकुला जैसे महत्वपूर्ण पारिस्थितिक केंद्र के अस्तित्व को खतरे में डाल सकती है।
एमएलसी के. शिवकुमार ने अधिकारियों की 'आलस्य और सुस्ती' पर हमला बोलते हुए कहा कि पिलिकुला की सार्वजनिक छवि बनाने में प्राधिकरण बहुत पीछे है। उन्होंने सुझाव दिया कि स्वामी विवेकानंद तारामंडल में खराब गुणवत्ता वाले शो के बजाय लेजर तकनीक का उपयोग किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि सुधार नहीं हुआ, तो अगले दशक के भीतर निसर्गधाम को बंद करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, पर्यटन और संस्कृति विभागों को भी फटकार लगाई गई है। एमएलसी टी. ए. शरवण ने कहा कि केवल 'करवाली उत्सव' के दौरान ही कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं है; पिलिकुला को साल भर सक्रिय रखने के लिए मासिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों की आवश्यकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: पिलिकुला निसर्गधाम के प्रबंधन में मुख्य समस्या क्या है?
उत्तर: मुख्य समस्या सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी, खराब जनसंपर्क और वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की अनदेखी है।
प्रश्न 2: विधायकों ने क्या सुझाव दिए हैं?
उत्तर: विधायकों ने बेहतर पीआर, लेजर तकनीक का उपयोग और साल भर सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव दिया है।