तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने चावल मिलर्स द्वारा बकाया राशि न चुकाने की 'ब्लैकमेलिंग' के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अधिकारियों को डिफाल्टर मिलों को जब्त करने और उनके संचालन को महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री ने चावल मिलर्स द्वारा बकाया राशि के भुगतान में देरी को 'ब्लैकमेलिंग' करार दिया।
- जानबूझकर भुगतान न करने वाले मिलर्स की मिलों को सरकार द्वारा अपने कब्जे में लेने के निर्देश।
- डिफाल्टर मिलों के संचालन के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को शामिल करने का प्रस्ताव।
- खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 50 से 100 एकड़ में नए गोदामों के निर्माण की योजना।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार चावल मिलर्स द्वारा सरकारी बकाया राशि के भुगतान में की जाने वाली किसी भी प्रकार की 'ब्लैकमेलिंग' को बर्दाश्त नहीं करेगी। बुधवार को नागरिक आपूर्ति विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बकाया वसूली के लिए एक व्यापक नीति तैयार करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उन मिलर्स से बकाया राशि वसूलने का आदेश दिया है जिन्होंने भुगतान में चूक की है। उन्होंने विशेष रूप से 'जानबूझकर चूक करने वाले' (willful defaulters) मिलर्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनकी मिलों को अपने नियंत्रण में लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन मिलों के संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सौंपने पर विचार कर रही है ताकि ग्रामीण सशक्तिकरण भी हो सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह कदम न केवल सरकारी राजस्व की सुरक्षा करेगा, बल्कि चावल मिलिंग क्षेत्र में पारदर्शिता भी लाएगा। मिलर्स द्वारा भुगतान में देरी अक्सर सरकारी खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करती है, जिससे अंततः आम जनता पर प्रभाव पड़ता है। मुख्यमंत्री का यह निर्णय राज्य के खाद्य सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बकाया राशि की वसूली के लिए मिलों को महिला समूहों को सौंपना एक क्रांतिकारी सामाजिक-आर्थिक कदम हो सकता है।
इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने पांच निर्वाचन क्षेत्रों में 50 से 100 एकड़ में गोदामों के निर्माण का निर्देश दिया है। इन क्षेत्रों का चयन अनाज की पैदावार के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इस निर्माण कार्य में ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत उपलब्ध खाद्य पदार्थों का उपयोग किया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. मुख्यमंत्री ने मिलर्स के खिलाफ क्या कार्रवाई करने को कहा है?
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को बकाया राशि न चुकाने वाले मिलर्स की मिलों को अपने कब्जे में लेने और वसूली के लिए सख्त नीति बनाने का निर्देश दिया है।
2. डिफाल्टर मिलों का संचालन किसे सौंपा जा सकता है?
सरकार डिफाल्टर मिलों के संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को सौंपने पर विचार कर रही है।